http://www.bbcchindi.com

शनिवार, 23 दिसंबर, 2006 को 07:26 GMT तक के समाचार

एना बोनाल्डो
स्टूडियो मैनेजर, बीबीसी

'मैं, जो पहली बार बिहार आई हूँ...'

ये मेरा भारत का पहला दौरा नहीं था लेकिन यह आँख खोलने वाला दौरा ज़रुर था.

मेरे दिल में हमेशा से भारत के प्रति झुकाव रहा है... नहीं-नहीं भारत से लगाव रहा है, प्यार रहा है.

शायद इसलिए जब मुझसे क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान बीबीसी हिंदी के रोडशो के लिए भारत आने को कहा गया तो मैं क्रिसमस छोड़कर भारत आने को तैयार हो गई.

मैं इससे पहले 11 बार भारत आ चुकी हूँ लेकिन बिहार का यह मेरा पहला दौरा था.

मैं महाराष्ट्र और गोवा के साथ-साथ राजस्थान, हिमाचल प्रदेश के बारे में बहुत कुछ जानती हूँ लेकिन बिहार को बिल्कुल नहीं.

बिहार दौरे में बरौनी, गोपालगंज, सिवान, मुंगेर, पटना, देवघर जाने के बाद मुझे पता चला कि बिहार के लोग कितने मेहनती हैं.

मैं यह नहीं कहना चाहती कि भारत के बाकी लोग मेहनती नहीं हैं लेकिन बिहार में संसाधनों के अभाव और ख़राब हालात के बाद भी लोगों की मेहनत देखने लायक थी.

एक और भारत

बिहार ने मुझे भारत का एक और पहलू दिखाया है.

मैं महाराष्ट्र, गोवा, उत्तर पूर्व जा चुकी हूँ और मैं भारत की विविध संस्कृति, योग-ध्यान, धर्म के बारे में पढ़ती रही हूँ लेकिन बिहार ने भारत की असली तस्वीर से मुझे रुबरु कराया.

मुझे यह भी पता चला कि बिहार की राजधानी पटना में 322 ईसा पूर्व में लोकतांत्रिक प्रणाली का शासन चलता था. मुझे आश्चर्य तो हुआ लेकिन खुशी भी बहुत हुई. मैं उन अवशेषों को देखने गई और वहाँ धन्वंतरि वैद्य के अस्पताल के अवशेष देखे.

धन्वंतरि के हर्बल बागान में आंवले के पौधों को देखकर मुझे गोवा की उस दुर्घटना की याद आ गई जहाँ मेरी त्वचा बुरी तरह खराब हो गई थी. आंवले के लेप से ही मेरी त्वचा पूरी तरह ठीक हो पाई थी.

बिजली की समस्या, ख़राब सड़कें, अंधेरा ही अंधेरा लेकिन लोगों में उम्मीद की ऐसी किरण मैंने कहीं और नहीं देखी.

देवघर में मुझे अलग धर्म का होने के बावजूद भी पूजा करने दिया गया. हालांकि बाद में पता चला कि अब यह स्थान नए राज्य झारखंड में चला गया है.

'बिहार आकर अच्छा लगा'

इसी से थोड़ी दूर मुंगेर में योग का विद्यालय था जहाँ से मैंने किताबें ख़रीदीं. मैं सोच भी नहीं सकती थी कि बिहार में योग से जुड़ा कोई विद्यालय होगा.

मुझे हिंदी सेवा के साथियों ने बताया कि यह राज्य देश के सबसे पिछड़े राज्यों में शुमार होता है लेकिन बिहार की धरती मुझे बड़ी उपजाऊ लगी.

दूर-दूर तक लहलहाते हरे भरे खेत दिखे. सिर पर भारी मटका रखकर पानी लाती औरतें मुझे देखकर शर्माती क्योंकि मैं दिखने में उनके जैसी नहीं थी.

हम जहाँ भी रुकते, बच्चे-बच्चियाँ-औरतें सब मुझे बड़ी उत्सुकता से देखते तो मुझे अजीब लगता लेकिन जहाँ भी गई मुझे बहुत प्यार मिला.

मैं थोड़ी बहुत हिंदी भी सीख गई हूँ लेकिन अपनी टूटी-फूटी हिंदी में इतना ही कह पाती हूँ कि मुझे बिहार आकर बहुत अच्छा लगा.