गुरुवार, 21 दिसंबर, 2006 को 20:06 GMT तक के समाचार
नवंबर 2005 में इराक़ के हदीथा में 24 नागरिकों की मौत को लेकर आठ सैनिकों के ख़िलाफ़ मामले हैं. इनमें एक सार्जेंट सहित चार अमरीकी सैनिकों के ख़िलाफ़ हत्या के आरोप लगाए गए हैं.
शेष चार लोगों के ख़िलाफ़ घटना को छिपाने के आरोप हैं.
यदि हत्या का आरोप झेल रहे सैनिक दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हो सकती है.
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2005 को घटी इस घटना में 24 लोग मारे गए थे जिनमें महिलाएँ और बच्चे शामिल थे.
अमरीकी सेना ने पहले इसे बम विस्फोट और विद्रोहियों के हमले के जवाब में हुई गोलीबारी कहा था.
घटना में शामिल टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे सार्जेंट फ़्रैंक वुटेरिच पर आरोप है कि उन्होंने 12 इराक़ी नागरिकों की हत्या की और अपने सहयोगियों को छह लोगों की हत्या के आदेश दिए.
बीबीसी के निक माइल्स का कहना है कि इस घटना ने अमरीकी सैनिकों के प्रशिक्षण और इराक़ में अमरीकी सेना के नेतृत्व को लेकर बहस शुरु हो गई थी.
घटना
हदीथा शहर में 19 नवंबर को सड़क के किनारे हुए एक बम विस्फोट में एक मरीन सैनिक की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे.
सार्जेंट वुटेरिच के वकीलों का कहना है कि इसके बाद वे एक ऐसी लड़ाई में लग गए जो ग़ुस्से से भरी हुई थी.
यह सबकी जानकारी में है कि इस विस्फोट के बाद जब सार्जेंट वुटेरिच घटनास्थल पर पहुँचे तो पाँच निहत्थे लोगों को गोली मार दी गई थी.
इसके कुछ घंटों बाद मरीन सैनिकों ने तीन घरों पर हमला किया.
इसमें एक तीन साल के बच्चे, 76 साल के वृद्ध और कई महिलाओं सहित कई लोगों की मौत हो गई थी.
शुरुआत में तो मरीन की ओर से कहा गया था कि कई नागरिक विस्फोट में मारे गए थे और कई की मौत गोलीबारी के बीच फँसकर हो गई.
लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वहाँ मरीन सैनिकों की गोलियों के अलावा कोई गोलीबारी हुई ही नहीं थी.
बचाव पक्ष के वकील ने माना है कि इस घटना में हो सकता है कि कुछ निर्दोष नागरिकों की मौत हुई होगी लेकिन उन्होने यह मानने से इनकार कर दिया कि यह षडयंत्र पूर्वक की गई हत्या थी.
इस पूरे मामले की तो तब तक जाँच नहीं हुई जब तक इस पूरी घटना का एक नागरिक का बनाया गया वीडियो टाइम पत्रिका के दफ़्तर तक नहीं पहुँच गया.
जब पता चला कि मरीन की ओर से पहले आए बयान में ख़ामी थी तो इस मामले की जाँच के आदेश दिए गए.
हदीथा में नागरिकों के मारे जाने की घटना उन कई घटनाओं में से एक है जिसमें आरोप लगाए गए हैं कि अमरीकी फ़ौजों ने निर्दोष इराक़ियों को मारा.