सोमवार, 18 दिसंबर, 2006 को 05:37 GMT तक के समाचार
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के मसले पर छह देशों की बैठक सोमवार को बीजिंग में फिर से शुरू हो गई है. यह प्रयास एक वर्ष के इंतज़ार के बाद शुरू हो सका है.
लंबे समय से चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बाद बातचीत कर रहे इन छह देशों का प्रयास होगा कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए सहमत हो जाए.
इस बातचीत की शुरुआत करते हुए चीन के वरिष्ठ प्रतिनिधि वू दावेई ने कहा कि जिन मुद्दों पर चर्चा हो रही है वे काफ़ी जटिल और महत्वपूर्ण हैं.
हालांकि बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उत्तर कोरिया के इस बातचीत में हिस्सा लेने से यह मतलब नहीं निकालना चाहिए कि वो वाकई अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने की मंशा रखता है.
जानकारों का मानना है कि बातचीत की शुरुआत को तो एक सकारात्मक पहल के तौर पर देखा जाना चाहिए पर इसे लेकर संदेह ही है कि इस बातचीत से कुछ ज़्यादा हासिल हो सकेगा.
वार्ताकारों में चीन, जापान, रूस और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं.
पेचीदा मामला
संवाददाता का मानना है कि इसी वर्ष अक्टूबर में परमाणु परीक्षण कर चुके उत्तर कोरिया का इस वार्ता के दौरान यही प्रयास होगा कि वो अपने ऊपर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटवा सके.
उल्लेखनीय है कि एक साल पहले उत्तर कोरिया ने अमरीका के आर्थिक प्रतिबंध लगाने के विरोध में बातचीत बंद कर दी थी.
इससे पहले छह देशों की चर्चा आख़िरी बार सितंबर, 2005 में हुई थी जिसमें यह वादा किया गया था कि यदि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को रोक देता है तो उसे आर्थिक मदद दी जाएगी.
उत्तर कोरिया ने नौ अक्तूबर को परमाणु परीक्षण कर अंतरराष्ट्रीय जगत को हिला दिया था. उसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने उसके ख़िलाफ़ आर्थिक और सैन्य प्रतिबंध लगा दिए थे.
माना जाता है कि 1994 तक उत्तर कोरिया ने परमाणु कार्यक्रम पर अमल किया और फिर अचानक सभी परमाणु गतिविधियाँ रोक देने का ऐलान कर दिया था.
लेकिन दिसंबर, 2002 में उसने परमाणु कार्यक्रम को फिर शुरू कर दिया और संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों को निकाल बाहर किया था.