शुक्रवार, 15 दिसंबर, 2006 को 23:47 GMT तक के समाचार
इराक़ की सबसे बड़ी सहायता एजेंसी रेड क्रिसेंट ने आरोप लगाया है कि अमरीकी सैनिक उसके दफ़्तरों और वाहनों पर हमले कर रहे हैं.
सहायता एजेंसी के उपाध्यक्ष जमाल अल करबॉली ने जिनेवा में कहा कि अमरीकी सेनाओं के हमले उनके सामने सबसे बड़ी समस्या हैं.
उनका कहना था कि इससे सहायता कार्य में बाधा पड़ती है जबकि इन स्थानों पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है.
उनका कहना था,'' अमरीकी सैनिक संस्था के मुख्यालय पर ही चार से पाँच बार हमला कर चुके हैं. उन्होंने देखने के लिए दरवाजे और खिड़कियाँ तोड़ दीं. जब उन्हें कुछ नहीं मिला तो वे चले गए.''
इधर अमरीकी सेना का कहना है कि वह इन आरोपों की जाँच कर रही है.
ग़ौरतलब है कि रेड क्रिसेंट में लगभग एक हज़ार लोग काम करते हैं और उससे लगभग दो लाख स्वंयसेवी जुड़े हुए हैं.
यही एक मात्र सहायता एजेंसी है जो देश के सभी 18 प्रांतों में सक्रिय है. उसे अंतरराष्ट्रीय रेड क्रास से सहायता मिलती है.
'सैनिक बढ़ाए जाएंगे'
दूसरी ओर अमरीकी प्रशासन ने घोषणा की है कि उसकी नए साल में इराक़ में सैनिकों की संख्या बढ़ाए जाने की योजना है.
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि लगभग 25 हज़ार अतिरिक्त सैनिक इराक़ भेजे जा सकते हैं ताकि चरमपंथियों पर काबू पाया जा सके.
अमरीकी राष्ट्रपति बुश जनवरी में इस योजना की घोषणा कर सकते हैं.
वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका में सैनिकों की संख्या बढ़ाए जाने पर लंबी चर्चा हो चुकी है.
लेकिन अनेक अधिकारियों को सैनिकों की संख्या बढ़ाए जाने से फ़ायदा होने पर संदेह है.
संवाददाता का कहना है कि इन अधिकारियों का मानना है कि इराक़ में स्थिरता केवल राजनीतिक तरीकों से ही लाई जा सकती है.