शनिवार, 09 दिसंबर, 2006 को 03:41 GMT तक के समाचार
अमरीकी संसद ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते को मंज़ूरी दे दी है. इस समझौते के बाद भारत को असैनिक कार्यों के लिए परमाणु ईंधन मिल सकेगा.
अमरीका के हाउस ऑफ़ रिप्रेंज़ेटेटिव यानि प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों ने भारत के साथ परमाणु समझौते को भारी बहुमत से साथ मंज़ूरी दे दी.
प्रतिनिधि सभा में लंबी चली बहस के बाद 330 सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान किया जबकि 59 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया.
राष्ट्रपति बुश के हस्ताक्षर के साथ ही यह सहमति अब भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय समझौते में तब्दील हो जाएगी.
भारत ने इसका स्वागत किया है और इसे ऐतिहासिक बताया है. इस समझौते के बाद भारत को असैनिक कार्यों के लिए अमरीका से परमाणु ईंधन और तकनीक मिलेगी.
इस क़ानून के पास हो जाने के बाद अमरीका की तीन दशक पुरानी परमाणु अप्रसार नीति भी बदल जाएगी.
मुश्किलें
परमाणु समझौते के मसौदे में भारत की चिंताओं का ख़्याल रखते हुए कई प्रावधानों को ख़त्म कर दिया गया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि परमाणु समझौते के मसौदे में बदलाव को भारत अपने को एक बढ़ते परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के रूप में मान्यता की तरह देख रहा है.
लेकिन अब भी इस समझौते को लेकर तमाम अड़चनें ख़त्म नहीं हुई हैं.
परमाणु ईंधन सप्लाई करने वाले 45 सदस्य देशों को अब अपने क़ानून बदलने होंगे. इसके बाद ही भारत को परमाणु तकनीक मिल सकेगी.
दूसरी ओर परमाणु समझौते की आलोचना करने वालों का कहना है कि भारत के लिए छूट देने से उत्तर कोरिया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाना अमरीका के लिए मुश्किल होगा.
पिछले साल प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.