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सोमवार, 04 दिसंबर, 2006 को 10:30 GMT तक के समाचार

'इराक़ की स्थिति गृहयुद्ध से ख़तरनाक'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इराक़ में हिंसा का स्तर हाल के गृह युद्धों की स्थिति से भी बदतर है.

बीबीसी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में कोफ़ी अन्नान ने कहा कि काश, वे वर्ष 2003 में शुरू हुए इराक़ युद्ध को रोक पाते.

उन्होंने कहा कि अब इराक़ की स्थिति सद्दाम हुसैन के शासनकाल से भी ख़राब है. कोफ़ी अन्नान ने कहा कि इराक़ को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहायता की आवश्यकता है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में कोफ़ी अन्नान का कार्यकाल तीन सप्ताह बाद ख़त्म हो रहा है. दक्षिण कोरिया के बान की-मून उनकी जगह नए संयुक्त राष्ट्र महासचिव होंगे.

कोफ़ी अन्नान ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान इराक़ युद्ध सबसे कठिन समय रहा. पिछले कुछ समय से अन्नान ने कई बार इराक़ युद्ध की आलोचना की और चेतावनी भी दी थी कि इराक़ गृह युद्ध की ओर बढ़ रहा है.

लेकिन अब बीबीसी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इराक़ की स्थिति 1980 के दशक में लेबनान की स्थिति या हाल के अन्य गृह युद्धों के मुक़ाबले बदतर है.

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पूरे मध्यपूर्व की स्थिति संवेदनशील और जोख़िम भरी है और यह क्षेत्र एक अन्य संकट को नहीं झेल सकता.

उन्होंने कहा, "कुछ साल पहले जब लेबनान और अन्य देशों में लड़ाई हुई थी तो हमने उसे गृह युद्ध करार दिया था. इराक़ में तो हालात और भी ख़तरनाक है."

अपने कार्यकाल के आख़िरी दौर में पहुँच चुके कोफ़ी अन्नान ने कहा कि इस समय वे अन्य मुद्दों के अलावा सूडान के दारफ़ुर इलाक़े की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं.

कोफ़ी अन्नान ने यह भी स्पष्ट किया कि अपने कार्यकाल के दौरान वे जितना कर सकते थे, उन्होंने उतना किया और अपने तरीक़े से किया.

उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके बाद पद संभालने वाले बान की-मून अपना काम अच्छी तरह संभालेंगे.

मुश्किल हालात

अन्नान ने स्वीकार किया कि वर्ष 2003 में इराक़ पर अमरीकी नेतृत्व में हुए हमले को नहीं रोक पाना संयुक्त राष्ट्र के लिए बड़ा झटका था.

उन्होंने कहा, "हम इस झटके से उबर रहे हैं, लेकिन अभी पूरी तरह उबरे नहीं हैं और हम मानते हैं कि इराक़ युद्ध के चलते संगठन में तनाव अब भी बरकरार है."

अन्नान ने इराक़ के स्थिति को 'बेहद ख़तरनाक' बताया और आम इराक़ियों की हालत पर सहानुभूति व्यक्त की.

उन्होंने कहा, "यदि मैं आम इराक़ी होता तो ऐसे ही तुलना करता कि उनका एक तानाशाह था जो बेरहम था, लेकिन उस वक्त उनकी अपनी गलियाँ थी, जहाँ वे घूम सकते थे. उनके बच्चे स्कूल आ-जा सकते थे और माँ-बाप को यह आशंका नहीं रहती थी कि क्या वह अपने बच्चे को दोबारा देख सकेंगे."

अन्नान ने कहा, "समाज को सुरक्षा और सुरक्षित माहौल चाहिए. सुरक्षा के बग़ैर कुछ नहीं हो सकता."

कसक

घाना के कोफ़ी अन्नान 1962 में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े और 1997 की शुरुआत में इसके महासचिव बने.

उनकी नियुक्ति से कुछ साल पहले रवांडा में जनसंहार और यूगोस्लाविया में ग़ैर ईसाइयों की हत्या से संयुक्त राष्ट्र की छवि दागदार हुई.

हालाँकि इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने भविष्य में इस तरह की घटना नहीं होने देने का संकल्प लिया था, लेकिन सूडान के दारफ़ूर क्षेत्र में तीन साल से चले आ रहे संकट को सुलझाने में संगठन विफ़ल रहा है. दारफ़ूर में दो लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.

अन्नान ने कहा, "यह बेहद निराशाजनक था और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण. लेकिन हालात से निपटने के लिए हमारे पास न तो संसाधन थे और न ही इच्छाशक्ति."

उन्होंने दारफ़ूर संकट के समाधान के लिए काम करने का संकल्प व्यक्त किया.

सूडान की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र शांति सेना को वहाँ प्रवेश की इज़ाजत देने से इनकार कर दिया था.