गुरुवार, 30 नवंबर, 2006 को 23:35 GMT तक के समाचार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में एड्स के विस्तार पर चिंता जताई है. इससे लगभग चार करोड़ लोग पीड़ित हैं.
विश्व एड्स दिवस शुक्रवार को है और इस मौक़े पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि विभिन्न प्रयासों के बावजूद एचआईवी और एड्स फैलता जा रहा है और इस दिशा में तत्काल क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यवाहक महानिदेशक डॉक्टर एंडर्स नॉर्डस्ट्रॉम का कहना है कि इसके लिए धन, दवाएँ और समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकता है.
इससे प्रभावित लोगों की संख्या पूर्वी और मध्य एशियाई और पूर्वी यूरोपीय देशों में बढ़ती जा रही है.
दक्षिण अफ़्रीका शुक्रवार को एड्स से निपटने के पाँच साल के एक कार्यक्रम की घोषणा करने जा रहा है.
दक्षिण अफ़्रीका में एचआईवी और एड्स से लगभग 55 लाख लोग प्रभावित हैं और प्रतिदिन वहाँ लगभग 900 लोगों की इसकी वजह से मौत हो जाती है.
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का कहना है कि एचआईवी-एड्स से प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.
इससे सबसे अधिक नवयुवक प्रभावित होते हैं. बहुत से बच्चों को उनके माता-पिता की बीमारी या फिर मृत्यु के कारण मज़दूरी करनी पड़ती है.
दवाओं का संकट
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इसके ख़िलाफ़ मुहिम में आगे आए हैं.
उन्होंने गुरूवार को दो भारतीय दवा कंपनियों के साथ एक समझौते की घोषणा की जिसके तहत एचआईवी और एड्स से ग्रस्त बच्चों के लिए दवाइयाँ सस्ती दरों पर उपलब्ध होगीं.
एड्स से ग्रस्त लोगों को जो दवा दी जाती है उसे एंटी-रेट्रोवायरल ड्रग कहते हैं और उनसे एचआईवी संक्रमित लोगों की स्थिति भी बेहतर हो सकती है और उनके बचे रहने की संभावना भी बढ़ती है.
लेकिन अनुमान है कि केवल 10 में से एक अफ़्रीकावासी और केवल सात में से एक एशियाई रोगी का इलाज हो पाता है.
रिपोर्टों के अनुसार भारत में लगभग 57 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हैं और यदि इसकी रोकथाम के प्रयास नहीं किए गए तो लाखों लोग और प्रभावित हो सकते हैं.
नेशनल काउंसिल ऑफ़ अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की एक रिपोर्ट में तो यहाँ तक कहा गया है कि अगर भारत एचआईवी और एड्स का प्रसार रोकने में नाकाम रहता है तो देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है.