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मंगलवार, 28 नवंबर, 2006 को 14:30 GMT तक के समाचार

'शांति तभी जब अमरीका बाहर निकले'

ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह ख़मेनेई ने ईरान की यात्रा पर आए इराक़ी राष्ट्रपति से बात करने के बाद कहा है कि यदि सुरक्षा बहाल करनी है तो अमरीकी सेनाओं को इराक़ से जाना होगा.

उनका कहना था कि इराक़ में अस्थिरता इस क्षेत्र के सभी देशों के लिए नुक़सानदेह है और इस बात की कोई उम्मीद नहीं है कि अमरीका स्थिति में सुधार कर पाएगा.

इराक़ी राष्ट्रपति जलाल तालाबानी वहाँ बढ़ती हिंसा पर क़ाबू पाने में ईरान की सहायता पाने के प्रयास के लिए वहाँ गए हुए हैं.

अमरीका भी इस सारे मामले में ईरान की भागीदारी चाहता है लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस क़ीमत पर.

अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नैटो शिखर सम्मेलन के लिए लात्विया जाते हुए कहा था कि अमरीका ईरान से तभी बातचीत शुरू कर सकता है जब ईरान अपना परमाणु ईँधन संवर्द्धन कार्यक्रम बंद करे.

बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि हालाँकि अमरीका इस मामले में असहजता महसूस करेगा कि ईरान इराक़ मामले में मध्यस्थता कर रहा है लेकिन दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत बुश प्रशासन को इस संकट से अलग रहने में मदद देगी.

सोमवार को तालाबानी ने ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद से बात की जिनका कहना था कि ईरान के बस में जो भी है, वह करना चाहेगा.

इराक़ में सुरक्षा ज़रूरी

अहमदीनेजाद ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एक सुरक्षित, प्रगतिशील और शक्तिशाली इराक़ ईरान और पूरे क्षेत्र के हित में है.

तालाबानी पिछले चार दशक में ईरान आने वाले पहले इराक़ी राष्ट्राध्यक्ष हैं. यहाँ यह भी बतादें कि वह फ़ारसी भाषा बोलते हैं.

ईरान के सरकारी टेलीविज़न पर तालाबानी को यह कहते हुए बताया गया, "हमारी बातचीत का सबसे अहम हिस्सा इराक़ में सुरक्षा स्थापित करना है. हमें इराक़ में सुरक्षा और स्थिरता के लिए ईरान की मदद की ज़रूरत है".

इराक़ में 2003 में अमरीका के हमले के बाद से पिछला हफ़्ता सबसे ज़्यादा ख़ूनख़राबे वाला समय रहा है.

सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से कहा कि किसी गृहयुद्ध की स्थिति से बचने के लिए कड़े क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है.