इस साल हिज़्बुल्ला के साथ हुई लड़ाई के दौरान क्लस्टर बम इस्तेमाल करने के तरीके को लेकर इसराइली सेना जाँच करने जा रही है.
इसराइली रक्षा सेवाओं के प्रमुख ने कहा है कि उन्होंने लड़ाई के दौरान बड़े पैमाने पर बारूद इस्तेमाल करने के लिए मना किया था.
लेकिन दक्षिणी लेबनान में मानवाधिकार मामलों के पर्यवेक्षकों का कहना है कि लड़ाई के बाद लाखों छोटे बम वहाँ पाए गए.
जाँच करवाने का इसराइल का फ़ैसला एमनेस्टी इंटरनेशनल की नई रिपोर्ट का बाद लिया गया है.
इस रिपोर्ट में इसारइल-हिज़्बुल्ला युद्ध के तौर-तरीकों की संयुक्त राष्ट्र की अगुआई में जाँच करवाने की बात कही गई है.
जाँच रिपोर्ट
एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि लेबनान पर इसराइली हमले असुंलित हैं. रिपोर्ट में लड़ाई के अंतिम दिनों में क्लस्टर बम के संभावित उपयोग की आलोचना की गई है.
लड़ाई थमने के बाद से लेबनान में बमों के चलते 20 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
बीबीसी के क्रिस्पिन थोरोल्ड का कहना है कि हिज़्बुल्ला के साथ लड़ाई के बाद इसराइल आत्ममंथन कर रहा है.
सेना और सरकार ने जिस तरह लड़ाई को दिशा दी, उसे लेकर कई जाँचे चल रही हैं.
'निराशाजनक'
ताज़ा जाँच के बारे में इसराइली रक्षा प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल डैन हालुत्ज़ ने कहा है कि क्लस्टर बम का इस्तेमाल निराशाजनक बात है.
इसराइली सैनिक रेडियो के मुताबिक उन्होंने कहा कि ये पता लगाना होगा कि निर्देश स्पष्ट तौर पर दिए गए थे या नहीं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि एक इंफ़ैट्री अधिकारी ने बताया है कि क्लस्टर बम का इस्तेमाल किया जाना पहले से तय था.
वैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ये भी कहा है कि हिज़ुब्लाल ने भी आम नागिरकों पर मिसाइल दागे.
हालांकि इस बात के सुबूत नहीं मिले हैं कि हिज़्बुल्ला ने आम नागरिकों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया.
एमनेस्टी इंटननेशनल ने इसराइल से कहा है कि वो सामूहिक सज़ा को एक सैन्य हथकंडे के तौर पर उपयोग न करे.
इस साल 12 जुलाई को हिज़्बुल्ला ने दो इसराइली सैनिकों को अगवा कर लिया था जिसके बाद इसराइल ने लेबनान के ख़िलाफ़ अभियान शुरु कर दिया था.
इस दौरान करीब एक हज़ार लेबनान के नागरिकों की जान गई. इसमें से ज़्यादातर आम नागरिक शामिल थे. इसके अलावा 161 इसराइली लोगों की भी जान गई थी जिनमें से ज़्यादातर सैनिक थे.