शनिवार, 18 नवंबर, 2006 को 13:04 GMT तक के समाचार
नीदरलैंड के मुसलमानों ने औरतों के सार्वजनिक स्थानों पर बुरक़ा पहनने पर प्रतिबंध लगाने के सरकारी प्रस्ताव की आलोचना की है.
यहाँ के मुसलमानों का कहना है कि इस प्रतिबंध से देश के दस लाख मुसलमान ख़ुद को सामाजिक रूप से अलग-थलग महसूस करेंगे.
नीदरलैंड की संसद का कहना है कि बुरक़ा से सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा प्रभावित होती है.
संसद का यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिनों बाद वहाँ चुनाव होने वाले हैं और अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें सत्ताधारी गठबंधन जीत सकती है.
प्रस्तावित प्रतिबंध के तहत ट्रेनों, बसों, स्कूलों, अदालतों और सड़कों पर बुरक़ा पहनने पर पाबंदी लगा दी जाएगी.
अपनी सख़्त नीतियों के लिए चर्चित आव्रजन मंत्री रीटा वेरदौंक ने कहा, "भाईचारे और एकता के लिए यह ज़रूरी है कि नीदरलैंड के सभी लोग एक दूसरे को देख और पहचान सकें."
बयान
आव्रजन मंत्री ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "अगर चेहरा ढँका नहीं हो तो आपसी संबंधों में आसानी होती है. यह ज़रूरी है कि हम बातचीत के दौरान एक-दूसरे को देख सकें. हमारा समाज सहिष्णु है और हम एक-दूसरे का सम्मान करना जानते हैं."
प्रस्तावित क़ानून के आलोचकों का कहना है कि इस तरह का प्रतिबंध नागरिक अधिकारों का उल्लंघन है. नीदरलैंड की मुस्लिम संस्था सीएमओ का कहना है कि यह प्रस्ताव एक छोटी समस्या के प्रति बहुत बड़ी प्रतिक्रिया है.
विपक्षी ग्रीन पार्टी के मुस्लिम सांसद ने कहा कि नक़ाब का विरोध देश के सहिष्णु के इतिहास के ख़िलाफ़ है. नीदरलैंड की कुल एक करोड़ साठ लाख की आबादी का छह प्रतिशत मुसलमान हैं.
यह प्रस्ताव तब लाया गया है जब एक विशेषज्ञ कमेटी ने यह कहा है कि बुरक़े पर पाबंदी किसी क़ानून का उल्लंघन नहीं होगा.
इस प्रस्तावित क़ानून के दायरे में ऐसे हेलमेट पहनने पर भी पाबंदी होगी जिससे चेहरा नहीं दिखता हो.
इस समय बुरक़ा पहनने के मामले पर यूरोपीय देशों में गरम बहस छिड़ी हुई है. फ़्रांस ने पहले ही स्कूलों में स्कार्फ़ पहनने और धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा रखी है.
जर्मनी के कुछ राज्यों के स्कूलों में भी शिक्षकों के स्कार्फ़ पहनने पर प्रतिबंध है. इटली में आतंकवादी गतिविधियों पर रोक के लिए चेहरा ढँकने पर पाबंदी है. पिछले कुछ दिनों से ब्रिटेन में भी बुरक़ा पहनने पर तेज़ बहस जारी है.