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शुक्रवार, 17 नवंबर, 2006 को 00:06 GMT तक के समाचार

'अल-क़ायदा के ख़तरे को अनदेखा किया'

अल-क़ायदा के तंत्र में पहचान छिपाकर घुसे एक जासूस ने 1990 के मध्य में ब्रिटेन को अलक़ायदा के ख़तरों की चेतावनी दी थी लेकिन ब्रिटेन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की.

इस जासूस ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने अपने अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि अलक़ायदा अनुमानों से कही ज़्यादा सुगठित और सुव्यवस्थित संगठन है.

इस जासूस को ओमर नासिरी नाम दिया गया है.

उन्होंने ब्रिटेन और फ़्रांस में काम किया है और पहचान छिपाकर अफ़ग़ानिस्तान में अलक़ायदा के साथ प्रशिक्षण लिया था.

ओमर नासिरी ने यह भी दावा किया है कि अलक़ायदा ने इराक़ के ख़िलाफ़ युद्ध के लिए अमरीका को भड़काने के उद्देश्य से कुछ सबूत अपनी ओर से भी गढ़े थे.

उनका कहना है कि ऐसा तब हुआ था जब 2001 में जब ब्रिटेन ने अलक़ायदा और इराक़ के बीच संबंध के बारे में इब्न शेख अल-लिबी से पूछताछ की थी.

बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता गॉर्डन कोरिया का कहना है कि 1990 के दशक के मध्य में अल-क़ायदा के उभार की पर्याप्त जानकारियाँ दी गईं थीं.

उनका कहना है कि फ़्रासीसी सरकार अल्जीरियाई चरमपंथियों को लेकर चिंतित थी जबकि ब्रिटेन को अपने ऊपर हमले का ख़तरा दिख रहा था.

लेकिन ब्रिटेन और फ़्रांस दोनों के लिए काम कर चुके जासूस ने जो विवरण दिए थे उसके आधार पर कहा जा सकता है कि 'लोग पूरी दुनिया के प्रति ख़तरे की नज़र से नहीं देख रहे थे.'

नासिरी का प्रशिक्षण अफ़ग़ानिस्तान में हुआ था और उन्होंने अलक़ायदा के वरिष्ठ लोगों से मुलाक़ात की थी.

उन्होंने रासायनिक हथियारों के प्रयोगों की जानकारी दी है और कहा है कि कट्टरपंथी मुस्लिम मौलवी अबू हमज़ा अल-मसरी को लंदन में प्रशिक्षण दिया गया था.

यह पूछे जाने पर कि क्या प्रशिक्षण के दौरान कभी ऐसा हुआ जब वे यह भूल गए कि वह एक जासूस हैं तो उन्होंने कहा, "हाँ हर वक़्त."

उल्लेखनीय है कि अल-क़ायदा अमरीका पर 11 सितंबर 2001 को हुए हमलों के बाद से बहुचर्चित रहा है.