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वैटिकन ने भी बुरक़े पर एतराज़ जताया

यूरोपीय देशों में बुरक़े को लेकर चल रही बहस में वैटिकन भी शामिल हो गया है. उसने भी मुस्लिम महिलाओं के बुरक़ा पहनने पर सवाल उठाया है.

वैटिकन के कार्डिनल रेनाटो मार्टीनो ने कहा है कि आप्रवासी देश की परंपराओं, प्रतीकों, संस्कृति और धर्म का आदर करें.

उनका कहना था कि उन नियमों का आदर किया जाना चाहिए जो कुछ तरह के बुरक़ों पर प्रतिबंध लगाता है.

साथ ही वैटिकन के आर्कबिशप एगेस्तीनो मार्चेतो ने भी इस मामले पर कहा कि मुसलमानों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि उनकी कुछ परंपराएँ समाज के व्यापक हित में नहीं है.

बहस

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों ब्रिटेन के पूर्व विदेश मंत्री और हाउस ऑफ़ कामंस के नेता जैक स्ट्रॉ ने यह कहकर नई बहस छेड़ दी थी कि वे नहीं चाहते कि महिलाएँ बुरक़ा पहनें क्योंकि इससे समुदायों के बीच संबंध कठिन हो जाते हैं.

साथ ही ब्रिटेन की एक स्कूल की शिक्षिका आयशा आज़मी को बुरक़ा पहनकर पढ़ाने के कारण निलंबित कर दिया गया था.

स्थानीय काउंसिल ने आयशा आज़मी को बुरक़ा उतारकर फढ़ाने के लिए कहा था. लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और उसके बाद उन्हें नौकरी से निलंबित कर दिया गया.

इन दिनों वैटिकन और मुस्लिम समाज के रिश्ते नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं.

इसके पहले खुद पोप इस्लाम के बारे में की गई नकारात्मक टिप्पणी के कारण विवाद में फंस गए थे.

उनके बयान पर मुसलमानों ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी. उसके बाद पोप को अपने बयान के लिए कई बार खेद जताना पड़ा था.