शनिवार, 11 नवंबर, 2006 को 23:05 GMT तक के समाचार
हिज़्बुल्ला का कहना है कि लेबनान सरकार से सभी पाँचों शिया और सीरिया समर्थक मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. इसमें दो लोग हिज़्बुल्ला के और दो उसके सहयोगी संगठन अमाल आंदोलन से जुड़े हैं.
ये घोषणा विभिन्न दलों की उस बैठक के बाद आई जिसमें हिज़्बुल्ला ने सरकार में और अहम भूमिका दिए जाने की माँग की. लेकिन ये बातचीत बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई थी.
हिज़्बुल्ला को सीरिया और ईरान का समर्थन हासिल है और वह मंत्रिमंडल में और स्थान चाहता है ताकि मंत्रिमंडल के फ़ैसलों को वह वीटो कर सके. लेकिन संसद के अधिकांश दलों से इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया.
लेबनानी प्रधानमंत्री फ़ुआद सिन्यूरा ने कहा कि वो इस्तीफ़े स्वीकार नहीं कर रहे हैं. लेकिन पाँचों सदस्यों ने कहा है कि वे अपने इस फ़ैसले से पीछे नहीं हटेंगे.
ये इस्तीफ़े ऐसे समय आए हैं जब सरकार पूर्व प्रधानमंत्री रफीक हरीरी की पिछले साल हुई हत्या के बारे में संयुक्त राष्ट्र न्यायाधिकरण के मसौदे पर चर्चा करने जा रही है.
लेबनान में हिज़्बुल्ला और इसराइल के बीच हुए संघर्ष से पहले न्यायाधिकरण को लेकर तनाव चल रहा था.
ग़ौरतलब है कि इसराइल और हिज़्बुल्ला की 34 दिन चली लड़ाई में लगभग 1300 आम लेबनानी और 161 इसराइली मारे गए थे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हालांकि इन इस्तीफ़ों से सरकार नहीं गिरेगी लेकिन हिज़्बुल्ला के क़दम से लेबनान की राजनीति पर संकट छा गया है.
इन इस्तीफ़ों ने सभी को अचंभित किया है क्योंकि ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि सत्ता में भागीदारी के संबंध में बातचीत बाद में शुरू होगी.