शनिवार, 11 नवंबर, 2006 को 20:22 GMT तक के समाचार
अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र में उस प्रस्ताव को वीटो कर दिया है जिसमें इसराइली सेना के ग़ज़ा अभियान की आलोचना की गई थी.
इस प्रस्ताव का मसौदा क़तर ने पेश किया था जिसमें इस सप्ताह ग़ज़ा में इसराइली हमले में 18 फ़लस्तीनी नागरिकों के मारे जाने की निंदा की गई थी.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने इस प्रस्ताव के मसौदे को असंतुलित और राजनीति से प्रेरित क़रार दिया.
इस प्रस्ताव का सुरक्षा परिषद के 15 में से 10 सदस्य देशों ने समर्थन किया जबकि चार सदस्य अनुपस्थित रहे.
अनुपस्थित रहनेवाले देशों में ब्रिटेन, डेनमार्क, जापान और स्लोवाकिया शामिल थे.
दूसरा वीटो
इस साल यह दूसरी बार है जब अमरीका ने ग़ज़ा में इसराइल के सैन्य अभियान के संबंध में प्रस्ताव को वीटो किया है.
इसके पहले एक सैनिक को मुक्त कराने के इसराइल के अभियान के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव आया था.
ताज़ा प्रस्ताव में इसराइल के ग़ज़ा के बेत हनोन में किए हमले की निंदा की गई थी और इसराइली सेनाओं की वापसी की बात कही गई थी.
लेकिन बाद में प्रस्ताव में जोड़ा गया कि फ़लस्तीनी ऑथारिटी हिंसा रोकने के लिए कार्रवाई करे और संयुक्त राष्ट्र महासचिव इन मौतों की जाँच के लिए एक आयोग गठित करे.
अमरीकी राजदूत का कहना था कि अमरीका फ़लस्तीनी लोगों की मौतों के प्रति खेद व्यक्त करता है लेकिन वह प्रस्ताव की भाषा से सहमत नहीं है.
दूसरी ओर क़तर के राजदूत ने कहा कि वीटो से सुरक्षा परिषद की साख पर सवाल उठ खड़ा हुआ है और इससे मध्य पूर्व में हिंसा का दौर जारी रहेगा.
इसराइल ने पिछले महीने सैन्य अभियान शुरू किया था.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नागरिक इलाक़े में इसराइली टैंकों ने गोले दागे थे जिससे एक ही परिवार के कई लोगों की मौत हो गई. इसमें महिलाएँ और बच्चे शामिल थे.