अमरीकी संसद के मध्यावधि चुनावों के परिणाम आने के बाद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड की जगह अमरीकी गुप्तचर एजेंसी सीआईए के पूर्व अध्यक्ष रॉबर्ट गेट्स को रक्षा मंत्रालय सौंपने की घोषणा की.
रक्षा मंत्री बनने जा रहे रॉबर्ट गेट्स ने इस मौक़े पर कहा, "हम पूरी दुनिया में आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे हैं. हम अपनी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, अन्य गंभीर चुनौतियों का सामना भी कर रहे हैं. इस संघर्ष में क्या होता है, उस पर निर्भर होगा कि दशकों तक हमारी दुनिया का आकार क्या होता है."
गेट्स 63 साल के हैं और उन्होंने ज़्यादातर समय गुप्तचर एजेंसी सीआईए के अधिकारी के तौर पर गुज़ारा है और 1991 में वे राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सीनियर के कार्यकाल के दौरान सीआईए के निदेशक बने.
उन्हें विवादों का सामना भी करना पड़ा है और इनमें ईरान-कॉंट्रा मुद्दा प्रमुख रहा.
आजकल वे अमरीका की एक बहुत बड़े विश्वविद्यालय टेक्सास ए एंड एम विश्वविद्यालय के अध्यक्ष हैं.
ईरान-कॉंट्रा मामला
उनका जन्म कांसास प्रांत में विचिटा में हुआ था और वे 1966 में सीआईए में भर्ती हुए. उन्होंने छह राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में काम किया और वे एकमात्र ऐसे सीआईए अधिकारी हैं जो इस एजेंसी में शुरुआती स्तर से भर्ती होकर उसके निदेशक बने.
वे 1974-79 में व्हाइट हाऊस से राष्ट्रीय सुरक्षा स्टाफ़ में रहे.
वर्ष 1982-86 में वे सीआईए में उप निदेशक (गुप्तचर सेवा) थे और जब ईरान-कॉंट्रा मामला सुर्खियों में आया तो माना जा रहा था कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी होगी.
इस कांड में ग़ैर-क़ानूनी ढंग से ईरान को हथियारों की बिक्री की गई ताकि उससे मिलने वाले पैसे से निकारागुआ के कॉंट्रा विद्रोहियों को मदद की गई.
वे वहाँ सत्ताधारी वामपंथी सैंडिनिस्टा के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे थे.
गेट्स के ख़िलाफ़ 1991 में स्वतंत्र वकील ने जाँच की लेकिन किसी भी कथित दोष के संबंध में उनके ख़िलाफ़ मुकदमा नहीं चला.
'सीआईए कार्रवाई सही'
वर्ष 1996 में छपी अपनी किताब में उन्होंने शीत युद्ध में जीत पाने केलिए सीआईए की कार्रवाई को सही ठहराया.
वर्ष 1999 में एक भाषण में उन्होंने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में सीआईए का काम सबसे महत्वपूर्ण था.
उनका कहना था, "प्रत्यक्ष कार्रवाइयों में सीआईए को कई सफलताएँ मिलीं जिनमें से शायद सबसे बड़ी अफ़ग़ानिस्तान में थी. वहाँ सीआईए ने अपने प्रबंधन से अरबों डॉलर के हथियार और सामान मुजाहिदीन तक पहुँचाए.
इसीलिए सोवियत फ़ौज के ख़िलाफ़ विरोध बढ़ सका और उसे अंतत: अफ़ग़ानिस्तान से वापस जाने का राजनीतिक फ़ैसला करना पड़ा."
गेट्स को अमरीकी सरकारों ने कई बार सम्मानित किया है और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा पदक, राष्ट्रपति का नागरिक पदक और राष्ट्रीय ख़ुफ़िया सेवा में विशिष्टता पदक दिए जा चुके हैं.