सोमवार, 06 नवंबर, 2006 को 10:31 GMT तक के समाचार
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को फाँसी की सज़ा पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा है कि वो किसी को भी मौत की सज़ा दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि वो सद्दाम को ही नहीं, किसी को भी मौत की सज़ा दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं.
हालांकि उन्होंने अदालत की ओर से सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा सुनाए जाने के फ़ैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
उन्होंने कहा कि इस मामले पर सुनवाई के बाद दुनिया में सद्दाम हुसैन के निरंकुश और बर्बर शासन की यादें फिर से ताज़ा हो गई हैं.
इससे पहले अमरीका के राष्ट्रपति बुश ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा 'इराक़ के युवा लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर है.'
दूसरी ओर बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि सद्दाम हुसैन के बचाव पक्ष के वकील इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं. हालांकि वकीलों को अभी तक फ़ैसले की प्रति नहीं मिल सकी है.
कर्फ्यू
रविवार को इराक़ की एक अदालत ने सद्दाम हुसैन को दुजैल नरसंहार मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी. इस फ़ैसले को ध्यान में रखते हुए बग़दाद में कर्फ्यू लगा दिया गया था जिसमें अब ढील दी गई है.
सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ दुजैल नरसंहार मामले में फ़ैसला आने से पहले ही कई इलाक़ों में कर्फ़्यू लगाया गया था, जिसमें अब ढील दी गई है.
पहले केवल कुछ ज़रूरी वाहनों को ही शहर में आने-जाने की अनुमति दी जा रही है. रविवार को सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा दिए जाने की घोषणा के बाद कुछ सुन्नी बहुल इलाक़ों में विरोध-प्रदर्शन हुए थे.
इस दौरान बक़ूबा शहर में दो लोगों के मारे जाने की भी ख़बरें मिली. उधर शिया समुदाय के लोगों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया.
शिया समुदाय के लोगों ने हवा में गोलियाँ चलाकर और सड़कों पर उतरकर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की.
प्रतिक्रियाएँ
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा सुनाए जाने का स्वागत किया है. दूसरी ओर यूरोपीय संघ ने मौत की सज़ा पर अमल न करने का अनुरोध किया है.
ऐसे समय में जब चुनावों में बुश प्रशासन की इराक़ नीति पर बड़े सवाल उठाए जा रहे है, सद्दाम हुसैन के फ़ैसले के समय को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है.
हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इन आरोपों को निराधार बताया था कि सद्दाम हुसैन के मामले के फ़ैसले का अमरीकी चुनाव से कोई लेना देना है.
इस बीच सद्दाम हुसैन को सज़ा सुनाए जाने का शिया समुदाय ने स्वागत किया है तो सुन्नी समुदाय ने इसकी निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किए हैं.
इस फ़ैसले का शिया बहुल इलाक़ों में व्यापक स्वागत हुआ. ख़ासकर सद्र और नज़फ़ शहरों में शियाओं ने घरों से बाहर आकर ख़ुशी ज़ाहिर की और हवा में गोलियाँ चलाईं.
लेकिन सद्दाम हुसैन के गृह नगर तिकरित में लोग ख़ासे नाराज़ नज़र आए. वहाँ सद्दाम हुसैन के समर्थकों ने कर्फ्यू की परवाह किए बिना सद्दाम हुसैन की तस्वीरें लेकर रैलियाँ निकालीं और नारे लगाए.
भारत ने सतर्कतापूर्ण प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जीवन और मौत का फ़ैसला विश्वसनीय न्यायिक प्रक्रिया से होना चाहिए.