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रविवार, 05 नवंबर, 2006 को 12:04 GMT तक के समाचार

सद्दाम की सज़ा पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

इराक़ के राष्ट्रपति जलाल तलाबानी ने कहा है कि सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमा निष्पक्ष था. लेकिन उन्होंने फ़ैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

इराक़ की एक अदालत ने दुजैल नरसंहार मामले में पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को मौत की सज़ा सुनाई है.

राष्ट्रपति तलाबानी ने कहा कि फ़ैसले पर उनकी टिप्पणी से देश में हिंसा बढ़ सकती है. राष्ट्रपति तलाबानी इस समय पेरिस में हैं. उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि मुक़दमा निष्पक्ष था. मैं फ़ैसले पर टिप्पणी नहीं करूँगा क्योंकि मैं इराक़ी न्याय व्यवस्था की स्वतंत्रता का सम्मान करता हूँ."

दूसरी ओर इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुक़दमे की समाप्ति को देश के काले इतिहास पर फ़ैसला बताया.

सद्दाम हुसैन पर भारत में भी जनमत बँटा

सद्दाम हुसैन पर फ़ैसला आने के बाद अपने संबोधन में नूरी अल मलिकी ने कहा कि सद्दाम हुसैन इराक़ के सबसे ख़राब नेता हैं और इस फ़ैसले से शायद उन विधवाओं और अनाथ बच्चों को राहत मिलेगी, जो उनके कारण ही प्रभावित हुए हैं.

इराक़ में अमरीकी राजदूत ज़ल्मै ख़लीलज़ाद ने कहा है कि यह फ़ैसला इराक़ में स्वतंत्र समाज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है.

मिली-जुली प्रतिक्रिया

ब्रिटेन की विदेश मंत्री मारग्रेट बेकेट ने कहा है कि वे इसका स्वागत करती हैं कि सद्दाम हुसैन के न्याय का सामना किया और उन्हें अपने अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया.

इराक़ में इस फ़ैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया हुई है. देश के शिया बहुल इलाक़ों में फ़ैसले का स्वागत हो रहा है तो सद्दाम के गृह प्रांत सलाहुद्दीन में स्थिति बिल्कुल अलग है.

सद्र सिटी में लोगों ने हवा में गोलियाँ चलाकर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की तो तिकरित में लोगों ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

वर्ष 1982 में दुजैल नरसंहार में 148 लोग मारे गए थे जिनमें से ज़्यादातर शिया थे. इराक़ में मिली-जुली प्रतिक्रिया तो है ही. लेकिन कई लोगों को आशंका है कि इस फ़ैसले से हिंसा और बढ़ेगी.

राजधानी बग़दाद के सुन्नी बहुल ज़िले अदामिया में इस फ़ैसले के बाद हथियारबंद लोगों ने प्रदर्शन किया और पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई.