बुधवार, 01 नवंबर, 2006 को 20:15 GMT तक के समाचार
अमरीका ने कहा है कि इस बात के काफ़ी सबूत हैं कि सीरिया, ईरान और हिज़्बुल्ला लेबनान में सत्ता परिवर्तन की योजना बना रहे हैं.
अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस के मुताबिक सीरिया इस उम्मीद में है कि पूर्व लेबनानी प्रधानमंत्री रफ़ीक हरीरी की हत्या की जाँच के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल न बन पाए.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टोनी स्नॉ ने कहा है कि लेबनानी सरकार को पलटने की कोई भी कोशिश संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के ख़िलाफ़ जाएगी.
ग़ौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की एक समिति इस बात की जाँच कर रही है कि पिछले वर्ष हरीरी की हत्या के पीछे किसका हाथ था.
हिज़्बुल्ला की माँग
बीबीसी संवाददाता पॉल रेनोल्ड्स का कहना है कि लेबनान में स्थिति अभी तनावपूर्ण है क्योंकि हिज़्बुल्ला मंत्रिमंडल में एक तिहाई हिस्सेदारी की माँग कर रहा है.
अग़र ऐसा हुआ तो उसे सभी मामलों में निर्णायक भूमिका अदा करने की ताकत मिल जाएगी और फिर अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल को लेबनान की मंजूरी मिलने में मुश्किल हो सकती है.
हिज़्बुल्ला के नेता शेख हसन नसरूल्ला ने अपनी माँग के समर्थन में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है.
अमरीका को आशंका है कि इस तरह की अस्थिरता से फौद सिन्यूरा की सरकार गिर सकती है.
टोनी स्नॉ का कहना है, "सीरिया, ईरान और हिज़्बुल्ला लेबनान की चुनी हुई सरकार को गिराने की योजना बना रहे हैं. हम इस बात को लेकर ख़ासे चिंतित हैं."
इराक़ पर असर
व्हाइट हाउस के इस बयान से सीरिया और ईरान को इराक़ के भविष्य की बेहतरी में साझीदार बनाने की संभावनाओं को ठेस पहुँचा है.
ग़ौरतलब है कि पूर्व अमरीकी विदेश मंत्री जेम्स बेकर इराक़ पर गठित एक अध्ययन समूह की अध्यक्षता कर रहे हैं.
ऐसी संभावना है कि बेकर आयोग इराक़ की योजनाओं में सीरिया और ईरान को भी शामिल करने का सुझाव देगा.