बुधवार, 25 अक्तूबर, 2006 को 04:56 GMT तक के समाचार
एक समय था जब न तो कंप्यूटर थे, न ही उपग्रह. सूर्य और तारों की दिशा को देखते हुए ब्रिटेन के व्यापारियों ने समुद्र के रास्ते भारत तक की यात्रा की और वर्षों तक वहाँ राज किया.
इन दिनों भारत तो दूर की बात है, एक पत्रिका के अनुसार ब्रिटेन के बच्चे दुनिया के नक्शे पर ब्रिटेन को नहीं ढूंढ पा रहे हैं. दो तिहाई से भी कम बच्चे नक्शे पर अमरीका को ढूंढ पाए.
नेशनल ज़्योग्राफ़िक किड्स पत्रिका ने छह से 14 साल के बीच के एक हज़ार से ज़्यादा बच्चों से ये सवाल किया.
चौंकाने वाली बात ये रही कि लंदन में रहनेवाले कई बच्चों को यह नहीं मालूम था कि वो इंग्लैंड की राजधानी में रहते हैं.
यहाँ के शिक्षक संघ ने पत्रिका के इस सर्वेक्षण को बकवास बताया है और कहा है कि यह यहाँ के शिक्षकों और छात्रों की कड़ी मेहनत को प्रतिबिंबित नहीं करता है.
ज्ञान पर सवाल
इस पत्रिका का ये भी कहना है कि 86 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे जो नक्शे पर इराक़ को नहीं पहचान पाए और कम से कम 10 प्रतिशत ऐसे थे जो एक भी महाद्वीप का नाम नहीं बता सके.
पूरे ब्रिटेन में स्कॉटलैंड के बच्चों का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा और पूरे सर्वेक्षण की बात करें तो लड़कों का भौगोलिक ज्ञान लड़कियों से बेहतर पाया गया.
बकिंघम विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर एजुकेशन ऐंड एम्पलॉयमेंट रिसर्च के निदेशक प्रोफ़ेसर ऐलन स्मिदर्स कहते हैं कि ये काफ़ी ''डरावनी तस्वीर'' है.
उनका कहना है कि ये शोध दर्शाता है कि हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था में आधारभूत बातों पर बल देने की ज़रूरत है.
लेकिन शिक्षकों की यूनियन ने कहा है कि कई ऐसे गुट हैं जो इस तरह के सर्वेक्षणों से ब्रिटेन की शिक्षा पद्धति को नीचा दिखाने में लगे हैं.
ये निंदनीय है और छात्रों और शिक्षकों के असाधारण मेहनत को नकारने की कोशिश है.