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रविवार, 22 अक्तूबर, 2006 को 10:07 GMT तक के समाचार

विदेश मंत्रालय ने बयान से किनारा किया

अमरीका के विदेश मंत्रालय ने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी के उस बयान से किनारा किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि इराक़ में अमरीका का रवैया अंहकारी और मूर्खतापूर्ण था.

अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ ने अल-जज़ीरा टीवी को बताया था कि अमरीका अब इराक़ में जातीय हिंसा को रोकने के लिए अल-क़ायदा को छोड़कर किसी भी विद्रोही गुट से बात करने को तैयार है.

लेकिन बाद में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शॉन मैक्कोरमैक ने इस बात का खंडन किया कि अमरीका ने इराक़ में ‘अहंकार और मूर्खता’ का परिचय दिया है.

प्रवक्ता ने अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ के हवाले से कहा कि उनके बयान को ग़लत रूप में पेश किया गया है.

उधर एक अन्य ख़बर में व्वाहट हाउस ने कहा है कि इराक़ में अमरीकी नीति के बारे में न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट ग़लत है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीका एक समयसारिणी तैयार कर रहा है जिसमें ये तय किया जाएगा कि इराक़ी सरकार कब तक अपने लक्ष्यों को हासिल करेगी जैसे कि जातीय मिलिश्या का निशस्त्रीकरण.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा है कि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट सही नहीं है लेकिन उन्होंने माना कि अमरीका अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार नई रणनीति विकसित कर रहा है.

दूसरी ओर बीबीसी के साथ इंटरव्यू में ब्रिटेन के विदेश मंत्री किम हॉवेल्स ने सुझाव दिया है कि साल भर के भीतर इराक़ की सेना को अमरीकी सेना की अधिकतर ज़िम्मेदारियाँ सौंपी जा सकती हैं.

‘क्षेत्र की त्रासदी’

अमरीकी विदेश विभाग में निदेशक अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ ने अल-जज़ीरा टीवी से कहा था, ‘‘दुनिया इराक़ में असफलता का गवाह बन रही है. यह सिर्फ़ अमरीका की विफलता नहीं है बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए त्रासदी है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि इस मसले पर कड़ी निंदा की जा सकती है क्योंकि कोई शक नहीं कि अमरीका ने इराक़ में अहंकार और मूर्खता का परिचय दिया है.’’

विद्रोही गुटों से वार्ता के मसले पर अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ ने कहा, ‘‘हम बातचीत के लिए तैयार हैं क्योंकि अंत में सारी समस्याओं का हल मेल-मिलाप से ही निकलना है.’’

‘जीत है लक्ष्य’

अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ का यह बयान राष्ट्रपति बुश के साप्ताहिक रेडियो संबोधन के बाद आया. संबोधन में उन्होंने कहा था कि अमरीकी सेना विद्रोहियों से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करती रही है.

बुश ने अपने संबोधन में कहा था, ‘‘इराक़ में हमारा लक्ष्य स्पष्ट रूप से जीत है. इसे हासिल करने के लिए हम केवल रणनीति बदलते रहे हैं.’’

वाशिंगटन में बीबीसी के संवाददाता जेम्स वेस्टहेड का कहना है कि हालाँकि इराक़ के मसले पर अमरीकी नीति में आधिकारिक रूप से कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन लोगों के सुर बदले हुए हैं.

जनमत सर्वेक्षणों की माने तो अमरीकी संसद के मध्यावधि चुनावों में इराक़ नीति मुख्य मुद्दा होगा और इसमें बुश की रिपब्लिकन पार्टी को हार का मुँह देखना पड़ सकता है.

अगले महीने होने वाले चुनाव से पहले हुए ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार दो-तिहाई अमरीकी मानते हैं कि इराक़ में अमरीका की हार हो रही है.