रविवार, 22 अक्तूबर, 2006 को 08:42 GMT तक के समाचार
अमरीकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अमरीका ने इराक़ में ‘अहंकार और मूर्खता’ का परिचय दिया है.
अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ ने अल-जज़ीरा टीवी को बताया कि अमरीका अब इराक़ में जातीय हिंसा को रोकने के लिए अल-क़ायदा को छोड़कर किसी भी विद्रोही गुट से बात करने को तैयार है.
अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सेना के शीर्ष कमांडरों के साथ इराक़ में क्या रणनीति अपनाई जाए, इस पर चर्चा कर चुके हैं.
इस बीच व्हाइट हाउस ने इराक़ में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए समयबद्ध योजना बनाने की ख़बर को ख़ारिज कर दिया है.
ग़ौरतलब है कि अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने रक्षा मंत्रालय पेंटागन के सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी है.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता निकोल गिलमार्ड ने कहा है कि न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट सही नहीं है लेकिन उन्होंने माना कि अमरीका अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार नई रणनीति विकसित कर रहा है.
दूसरी ओर बीबीसी के साथ इंटरव्यू में ब्रिटेन के विदेश मंत्री किम हॉवेल्स ने सुझाव दिया है कि साल भर के भीतर इराक़ की सेना को अमरीकी सेना की अधिकतर ज़िम्मेदारियाँ सौंपी जा सकती हैं.
‘क्षेत्र की त्रासदी’
विदेश विभाग में निदेशक अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ ने अल-जज़ीरा टीवी से कहा, ‘‘दुनिया इराक़ में असफलता का गवाह बन रही है. यह सिर्फ़ अमरीका की विफलता नहीं है बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए त्रासदी है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि इस मसले पर कड़ी निंदा की जा सकती है क्योंकि कोई शक नहीं कि अमरीका ने इराक़ में अहंकार और मूर्खता का परिचय दिया है.’’
विद्रोही गुटों से वार्ता के मसले पर अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ ने कहा, ‘‘हम बातचीत के लिए तैयार हैं क्योंकि अंत में सारी समस्याओं का हल मेल-मिलाप से ही निकलना है.’’
‘जीत है लक्ष्य’
अल्बर्टो फ़र्नांडेज़ का यह बयान राष्ट्रपति बुश के साप्ताहिक रेडियो संबोधन के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमरीकी सेना विद्रोहियों से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव करती रही है.
बुश ने अपने संबोधन में कहा था, ‘‘इराक़ में हमारा लक्ष्य स्पष्ट रूप से जीत है. इसे हासिल करने के लिए हम केवल रणनीति बदलते रहे हैं.’’
वाशिंगटन में बीबीसी के संवाददाता जेम्स वेस्टहेड का कहना है कि हालाँकि इराक़ के मसले पर अमरीकी नीति में आधिकारिक रूप से कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन लोगों के सुर बदले हुए हैं.
जनमत सर्वेक्षणों की माने तो अमरीकी संसद के मध्यावधि चुनावों में इराक़ नीति मुख्य मुद्दा होगा और इसमें बुश की रिपब्लिकन पार्टी को हार का मुँह देखना पड़ सकता है.
अगले महीने होने वाले चुनाव से पहले हुए ताज़ा सर्वेक्षण के अनुसार दो-तिहाई अमरीकी मानते हैं कि इराक़ में अमरीका की हार हो रही है.