गुरुवार, 19 अक्तूबर, 2006 को 03:49 GMT तक के समाचार
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के अंतरराष्ट्रीय पोलिंग संगठन 'ग्लोबस्कैन' की मदद से कराए गए एक सर्वेक्षण में संकेत मिलते हैं कि दुनिया भर के 59 प्रतिशत लोग यातना दिए जाने के ख़िलाफ़ है.
सर्वेक्षण में शामिल आधे से अधिक लोगों का कहना है कि वे किसी को प्रताड़ित करने की नीति के ख़िलाफ़ हैं चाहे इसका मक़सद आतंकवादी हमलों से निर्दोष लोगों के बचाने के लिए सूचना एकत्रित करना ही क्यों न हो.
हालाँकि सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 29 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि कुछ मामलों में सरकारों को यातना देने की नीति अपनाने की अनुमति मिलनी चाहिए.
समर्थन
किसी न किसी स्वरुप में यातना का समर्थन करने वालों की संख्या उन देशों में अधिक है जो राजनीतिक हिंसा से जूझ रहे हैं.
इनमें इसराइल, अमरीका और भारत शामिल है. चीन में भी काफी लोगों ने यातना दिए जाने का समर्थन किया.
इसराइल में 43 प्रतिशत लोगों का मानना है कि क़ैदियों को यातना देनी चाहिए. हालाँकि 48 प्रतिशत लोग मानते हैं कि इस पर रोक लगनी चाहिए.
क़ैदियों के साथ बल प्रयोग को सही ठहराने वाले लोगों की संख्या इराक़, फिलीपिंस, इंडोनेशिया, रूस और चीन में भी अधिक है.
इसराइल में धार्मिक आधार पर लोगों की राय में अंतर पाया गया. बहुसंख्यक यहूदी समुदाय के 53 प्रतिशत लोगों की राय में नई जानकारी लेने के लिए क़ैदियों को यातना दी जा सकती है.
दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय भारी बहुमत से किसी तरह की यातना का विरोध करता है.
विरोध
किसी भी सूरत में यातना को ग़लत ठहराने वालों में पश्चिमी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के लोग सबसे आगे हैं.
यातना का विरोध करने वालों में इटली अव्वल है. यहाँ के 81 प्रतिशत लोग मानते हैं कि इसे किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता.
इस वर्ष मई से जुलाई के बीच हुए इस सर्वेक्षण में 25 देशों के 27 हज़ार से अधिक लोगों की राय ली गई.