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सोमवार, 16 अक्तूबर, 2006 को 21:56 GMT तक के समाचार

सुरक्षा परिषद सदस्यता का मामला उलझा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सात दौर के मतदान के बाद भी न तो ग्वांटेमाला और न ही वेनेज़ुएला सुरक्षा परिषद की अस्थायी क्षेत्रीय सीट पर चुना जा सका है.

ग़ौरतलब है कि अस्थायी सीट के लिए सुरक्षा परिषद के दो तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है.

वेनेज़ुएला अमरीकी विदेश नीति का मुखर विरोधी है और शुरुआती मतदान में वह ग्वांटेमाला से 30 वोटों से अधिक से पीछे था.

लेकिन पिछले दो दौर में वेनेज़ुएला ने काफ़ी प्रगति की और अब वह ग्वांटेमाला से केवल सात वोटों से पीछे है.

वेनेज़ुएला की उम्मीदवारी का अमरीका कड़ा विरोध कर रहा है.

दरअसल हाल में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज़ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए अपने भाषण में अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को 'शैतान' तक कह दिया था.

क्यूबा के नेता फ़िदेल कास्त्रो के क़रीबी दोस्त और ईरान के साथ निकट संबंधों वाले शावेज़ के अमरीका के साथ लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं.

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति का कहना है कि अमरीकी प्रभाव को कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में भारी सुधारों की ज़रूरत है.

पश्चिमी देशों का कहना है कि अगर वेनेज़ुएला सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर चुन लिया जाता है तो वह उसका इस्तेमाल अमरीका विरोधी अभियान के लिए कर सकता है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि फ़ैसला न होने के कारण अब उरुग्वे, कोस्टा रीका, डोमिनिक रिपब्लिक और मैक्सको जैसे देश वैकल्पिक उम्मीदवार के रूप में उभर सकते हैं.

संवाददाता का कहना है कि वेनेज़ुएला और ग्वांटेमाला की प्रतिस्पर्धा ने शीत युद्ध के दिनों की याद ताज़ा कर दी है.

सन् 1979 में सुरक्षा परिषद के लिए क्यूबा और कोलंबिया के बीच भी नाटकीय मुक़ाबला हुआ था.