रविवार, 15 अक्तूबर, 2006 को 19:39 GMT तक के समाचार
अमरीका ने चीन से अपील की है कि एक हफ़्ते पहले परमाणु परीक्षण करने वाले उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ वह प्रतिबंधों को सख़्ती से लागू करे.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बॉल्टन ने चीन से यह अपील की है.
उल्लेखनीय है कि उत्तर कोरिया ने पिछले सोमवार को परमाणु परीक्षण करने का दावा किया था.
इसके बाद शनिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी.
प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित होने के बाद चीन ने कहा था कि उत्तर कोरिया जाने-आने वाले जहाज़ों की जाँच का मामले को सख़्ती से लागू कर पाना संभव नहीं दिखता क्योंकि यह भड़काने वाली कार्रवाई साबित हो सकती है.
कमज़ोर कड़ी
अमरीका मानता है कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों को सख़्ती से लागू करने की प्रक्रिया में चीन एक कमज़ोर कड़ी है.
इससे पहले जब प्रस्ताव के प्रारुप पर चर्चा हो रही थी तब भी चीन ने रुस के साथ मिलकर उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई का विरोध किया था.
आख़िर प्रारुप पर लंबे बहस के बाद सहमति बनी तो लेकिन अब चीन उसे लागू करने में असमर्थता जता रहा है.
एक टेलीविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में जॉन बॉल्टन ने कहा है कि उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण चीन के लिए सार्वजनिक अपमान की तरह है.
लेकिन अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस इस मामले को निपटाने में चीन की भूमिका को लेकर आशावादी दिखती हैं. वे अगले हफ़्ते वहाँ का दौरा करने वाली हैं.
राइस चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जाएँगी और उन देशों से उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंध को सख़्ती से लागू करने के लिए उपायों पर चर्चा करेंगी.
दरअसल, कोंडोलीज़ा राइस इन देशों को मनाने की कोशिश करेंगी कि अगर उत्तर कोरिया भविष्य में और परमाणु परीक्षण करता है तो सुरक्षा परिषद में और कड़ा प्रस्ताव लाया जाए.
बताया जा रहा है कि पिछले सोमवार को किया गया परीक्षण पूरी तरह से सफल नहीं रहा.