रविवार, 15 अक्तूबर, 2006 को 01:47 GMT तक के समाचार
जापान और दक्षिण कोरिया ने सुरक्षा परिषद के उत्तर कोरिया पर परमाणु परीक्षणों के कारण लगाए गए प्रतिबंधों का स्वागत किया है.
जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे ने कहा कि दुनिया ने उत्तर कोरिया को एक कड़ा संदेश भेजा है कि उसका परमाणु हथियारों को रखना स्वीकार नहीं किया जाएगा.
उनका कहना था कि जापान अपनी ओर से कुछ और प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है.
लेकिन रूस का कहना है कि उत्तर कोरिया चाहता है कि उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर छह देशों की बातचीत फिर से शुरू की जाए.
उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने परमाणु परीक्षण को लेकर उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया है.
सर्वसम्मति से प्रस्ताव
प्रस्ताव 1718 में हथियारों और आर्थिक प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था है लेकिन इसमें सैनिक कार्रवाई की बात नहीं है.
संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के राजदूत ने कहा कि वो इस प्रस्ताव को अस्वीकार करते हैं और उन्होंने इसके विरोध में बैठक का बहिष्कार किया.
इधर संयुक्त राष्ट्र के नवनिर्वाचित महासचिव बान की मून ने कहा कि वो परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए उत्तर कोरिया जाने को तैयार हैं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव पारित कर उत्तर कोरिया को कड़ा संदेश दिया है.
इस प्रस्ताव को समर्थन देने के लिए चीन को लंबी बातचीत के बाद सहमत हुआ.
दरअसल रूस और चीन चाहते थे कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ उठाए जाने वाले क़दम बहुत सख़्त न हों.
अमरीका ने प्रस्ताव का जो मसौदा तैयार किया था, उस पर आपत्ति के बाद उसे कई बार बदला गया.
रूस का कहना था कि यह महत्वपूर्ण है कि इस प्रस्ताव में ऐसा कोई संकेत नहीं मिले कि उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की जा सकती है.
उसका कहना था कि ज़्यादा सख़्ती से मामला और बिगड़ जाएगा.
प्रस्ताव के बाद अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया को कड़ा संदेश दिया है ताकि कोरिया प्रायद्वीप परमाणु हथियारों से मुक्त रह सके.
उल्लेखनीय है कि पिछले सोमवार को उत्तर कोरिया ने दावा किया था कि उसने परमाणु परीक्षण किया था.
प्रस्ताव
सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ जो प्रस्ताव पारित किया, उसमें निम्न बातें प्रमुख हैं.