शुक्रवार, 13 अक्तूबर, 2006 को 21:00 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र के नए महासचिव चुने गए दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री बान की-मून के बारे में उनके समर्थक कहते हैं कि वे एक सक्षम मध्यस्थ और विश्वस्तर के प्रशासक हैं.
दुनिया की बड़ी ताक़तों ने उनके समर्थकों से सहमति जताते हुए उन्हें यह बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी है.
वैसे कई विश्लेषक इस बात को लेकर चिंता जताते रहे हैं कि बान की-मून के व्यक्तित्व में वह करिश्मा नहीं है कि वह ऐसे कठिन समय में संयुक्त राष्ट्र का नेतृत्व कर सकें.
जबकि बान की-मून ख़ुद अपने आपको 'सामंजस्य बिठाने वाला, संतुलन क़ायम करने वाला और मध्यस्थ' कहते हैं.
अपने मनोनयन से लेकर चयन तक वह संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की बात करते रहे हैं. उनका कहना है कि अब संस्था को बातें कम करना चाहिए और काम अधिक.
कार्यप्रणाली
बीबीसी के सियोल संवाददाता चार्ल्स स्कैनलन का कहना है कि सर्वसम्मति की नीति से काम करना और पर्दे के पीछे की सौदेबाज़ी से मामलों को निपटाने की उनकी कार्यपद्धति अब संयुक्त राष्ट्र में भी देखने को मिलेगी.
हालांकि जनवरी 2004 में बान की-मून के विदेश मंत्री बनने के बाद से दक्षिण कोरिया कूटनीतिक रुप से अकेला ही पड़ा है और उसकी नीतियों के चलते ये सवाल खड़े होते रहे हैं कि दक्षिण कोरिया का नेतृत्व अमरीका का सामना किस तरह करता है.
लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि चीन के साथ बान की-मून के जो मधुर संबंध हैं उसी का लाभ उठाकर वे चीन का उपयोग अमरीकी प्रभाव को कम करने के लिए कर सकते हैं.
वह ख़ुद अपने बारे में कहते हैं, "मैं बाहर से देखने में भले नर्म नज़र आता हूँ लेकिन ज़रुरत पड़ने पर मैं सख़्ती से पेश आ सकता हूँ."
पुराना रिश्ता
बान की-मून बताते हैं कि रेडक्रॉस के एक कार्यक्रम के सिलसिले में 1962 में उनकी मुलाक़ात अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ़ कैनेडी से हुई थी.
वे बताते हैं कि तब वह 18 साल के थे और तभी उनके मन में पहली बार आया था कि वे राजनयिक बनेंगे.
संयुक्त राष्ट्र से उनका संबंध पुराना है. 1975 में वे दक्षिण कोरिया के गृहमंत्रालय में संयुक्त राष्ट्र प्रभाग में काम किया करते थे.
ऑस्ट्रिया में दक्षिण कोरिया के राजदूत रहते हुए बान की-मून ने उस आयोग की अध्यक्षता की थी जिसने व्यापक परमाणु निरस्त्रीकरण संधि का प्रारुप तैयार किया था.
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 56 वीं अध्यक्षता जब दक्षिण कोरिया को मिली तो उसमें भी बान की-मून ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
यह भूमिका महत्वपूर्ण इसलिए थी क्योंकि यह कार्यकाल 11 सितंबर को अमरीका में अलक़ायदा के हमले के बाद से, यानी 12 सितंबर 2001 से शुरु हुई थी.
उन पर पहली ज़िम्मेदारी यह सौंपी गई थी कि वे इस हमले की निंदा करने वाले प्रस्ताव को पारित करने के लिए सर्वसम्मति बनाएँ.
13 जून 1944 को पैदा हुए बान की-मून ने सियोल विश्वविद्यालय से 1970 में अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर स्नातक की डिग्री ली थी.
बाद में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरियाई कार्यालय में काम किया.
बान की-मून 1996 में राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने और वर्ष 2000 में उपमंत्री.
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर छह देशों की वार्ता में भी उनकी भूमिका को अहम माना जाता है.
लेकिन उनके विदेश मंत्री रहते हुए उत्तर कोरिया के मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की अनदेखी करने के लिए उन पर आरोप भी लगाए जाते हैं.
बान की-मून के परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटियाँ और एक बेटा है.