सोमवार, 09 अक्तूबर, 2006 को 16:59 GMT तक के समाचार
अमरीका ने उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने का 13 सूत्री प्रस्ताव तैयार किया है. इस पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देश विचार करेंगे.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की कड़ी आलोचना की.
सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन बोल्टन ने कहा कि सभी सदस्य देश मज़बूत और तुरंत जवाब के पक्ष में हैं.
सिर्फ़ ईरान ही एक ऐसा देश है जिसने परमाणु परीक्षण को सही ठहराया है. ईरान के सरकारी रेडियो ने कहा है कि जो भी हुआ उसके लिए अमरीका ज़िम्मेदार है क्योंकि वह उत्तर कोरिया को नीचा दिखाता रहा है.
उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान उन्हें कोई नहीं दिखा जो उत्तर कोरिया की कार्रवाई का बचाव करता. संयुक्त राष्ट्र में जापानी राजदूत केन्ज़ो ओशिमा ने उत्तर कोरिया से अपील की है कि वह आगे कोई परीक्षण ना करे.
इस समय जापान के पास सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता है. केन्ज़ो ओशिमा ने उत्तर कोरिया से अपील की कि वह छह देशों की बहुपक्षीय बातचीत में शामिल हो.
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद अब उस प्रस्ताव पर काम करना शुरू करेगा, जिसका मसौदा अमरीका ने तैयार किया है.
इसके तहत उत्तर कोरिया के साथ जनसंहार के हथियार बनाने में मददगार पदार्थों का कारोबार रोकना, आयात-निर्यात पर निगरानी और वैसे वित्तीय लेनदेन को रोकना जिसका इस्तेमाल उत्तर कोरिया परमाणु प्रसार के मकसद से करता है.
दूसरी ओर उत्तर कोरिया के राजदूत पाक गिल योन ने कहा है कि सुरक्षा परिषद को चाहिए कि वह उत्तर कोरिया को बधाई दे, इसके उलट वह बेकार का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है.
उन्होंने कहा कि उनके देश ने जो परमाणु परीक्षण किया है, उससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता क़ायम होगी.
आलोचना
उधर उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण पर कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस चुनौती का जवाब देगा.
राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि परमाणु परीक्षण से उत्तर कोरिया के दबे-कुचले लोगों की सहायता नहीं होगी.
उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की कई देशों ने कड़ी आलोचना की है. चीन ने उत्तर कोरिया के इस क़दम को 'शर्मनाक' कहा है. चीन का कहना है कि उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय भावना की अनदेखी की है.
उसने मांग की कि उत्तर कोरिया आगे ऐसे किसी भी क़दम पर रोक लगाए जिससे क्षेत्र में अस्थिरता का वातावरण बन जाए.
लेकिन चीन ने अन्य देशों से भी संयम की अपील की है. चीन को उत्तर कोरिया का क़रीबी माना जाता है. अमरीका ने इस क़दम को उकसाने वाली कार्रवाई बताया है.
अमरीका का कहना है कि वह क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है. व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने उम्मीद जताई कि सुरक्षा परिषद जल्द ही इस मामले में क़दम उठाएगा.
चीन के बाद दक्षिण कोरिया के दौरे पर गए जापान के प्रधानमंत्री शिन्ज़ो आबे ने कहा है कि उत्तर कोरिया को माफ़ नहीं किया जा सकता.
दक्षिण कोरिया ने भी कहा है कि वह उत्तर कोरिया की कार्रवाई का कड़ाई से जवाब देगा. रूस ने कहा है कि उत्तर कोरिया परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर होने वाली बातचीत में शामिल हो.
भारत और पाकिस्तान ने भी उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की आलोचना की है. भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय भावना की अनदेखी बताया है तो पाकिस्तान ने कहा है कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता आ सकती है.