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सोमवार, 09 अक्तूबर, 2006 को 09:25 GMT तक के समाचार

जॉर्ज बुश ने कहा, सुरक्षा परिषद तुरंत कार्रवाई करे

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस चुनौती का जवाब देगा.

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि परमाणु परीक्षण से उत्तर कोरिया के दबे-कुचले लोगों की सहायता नहीं होगी.

उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की कई देशों ने कड़ी आलोचना की है. चीन ने उत्तर कोरिया के इस क़दम को 'शर्मनाक' कहा है. चीन का कहना है कि उत्तर कोरिया ने अंतरराष्ट्रीय भावना की अनदेखी की है.

उसने मांग की कि उत्तर कोरिया आगे ऐसे किसी भी क़दम पर रोक लगाए जिससे क्षेत्र में अस्थिरता का वातावरण बन जाए.

लेकिन चीन ने अन्य देशों से भी संयम की अपील की है. चीन को उत्तर कोरिया का क़रीबी माना जाता है. अमरीका ने इस क़दम को उकसाने वाली कार्रवाई बताया है.

अमरीका का कहना है कि वह क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है. व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने उम्मीद जताई कि सुरक्षा परिषद जल्द ही इस मामले में क़दम उठाएगा.

चीन के बाद दक्षिण कोरिया के दौरे पर गए जापान के प्रधानमंत्री शिन्ज़ो आबे ने कहा है कि उत्तर कोरिया को माफ़ नहीं किया जा सकता.

दक्षिण कोरिया ने भी कहा है कि वह उत्तर कोरिया की कार्रवाई का कड़ाई से जवाब देगा. रूस ने कहा है कि उत्तर कोरिया परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर होने वाली बातचीत में शामिल हो.

भारत और पाकिस्तान ने भी उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण की आलोचना की है. भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय भावना की अनदेखी बताया है तो पाकिस्तान ने कहा है कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता आ सकती है.

परमाणु परीक्षण

रूस के रक्षा मंत्री ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने पाँच से पंद्रह किलोटन विस्फोट की क्षमता वाले परमाणु हथियार का परीक्षण किया है. यानी इसकी क्षमता हिरोशिमा पर गिराए गए बम के क़रीब-क़रीब बराबर है.

अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उत्तर कोरिया ने पहली बार परमाणु परीक्षण किया है. उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने परमाणु विस्फोट को सफल बताया है.

उत्तर कोरिया ने देश के पूर्वोत्तर इलाक़े गिलजू में स्थानीय समय के मुताबिक़ 10.36 बजे भूमिगत परमाणु परीक्षण किया. सिस्मोग्राफ़ पर इसे दूरदराज़ ऑस्ट्रेलिया तक में मापा गया.

रूस के सैनिक अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है. रूस के रक्षा मंत्री सर्जेई इवानोफ़ ने कहा है कि यह परमाणु परीक्षण पाँच से पंद्रह किलोटन के हथियार का था.

इसका मतलब ये हुआ कि इस परमाणु हथियार की क्षमता उस परमाणु बम जैसी ही है जो 1945 में जापानी शहर हिरोशिमा पर गिराया गया था.

परमाणु परीक्षण की ख़बर मिलते ही दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति रोह मू ह्यून ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई और देशभर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया.

पिछले सप्ताह ही उत्तर कोरिया ने इसकी घोषणा की थी कि वह जल्द ही परमाणु परीक्षण करेगा. रविवार को ही चीन और जापान ने भी संयुक्त रूप से एक बयान जारी करके उत्तर कोरिया को चेतावनी दी थी कि ऐसे किसी भी क़दम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

शेयर बाज़ार में गिरावट

उत्तर कोरिया के पहले परमाणु परीक्षण की ख़बर मिलते ही एशिया भर के शेयर बाज़ारों में गिरावट देखी गई. सबसे ज़्यादा गिरावट दक्षिण कोरिया के शेयर बाज़ार में देखी गई.

दक्षिण कोरिया को दुनिया की दसवीं बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है. एक समय तो शेयर बाज़ार का सूचकांक कोस्पी 3.6 फ़ीसदी तक गिर गया था. हालाँकि इसके बाद सूचकांक थोड़ा संभला.

हांगकांग, सिंगापुर, जकार्ता, सिडनी, बैंकॉक और मनीला के शेयर बाज़ारों में भी गिरावट दर्ज की गई. अमरीकी डॉलर के मुक़ाबले जापानी येन पिछले सात महीने के न्यूनतम स्तर तक पहुँच गया.

कच्चे तेल और सोने की क़ीमतों में भी बढ़ोत्तरी देखी गई.

आकलन

दुनियाभर के सुरक्षा विशेषज्ञ और राजनेता उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण के होने वाले प्रभावों का आकलन करने में जुटे हैं. हालाँकि इस बारे में ज़्यादा सूचना नहीं है.

विशेषज्ञ ख़ासकर ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस परीक्षण के बाद उत्तर कोरिया किसी ठिकाने पर परमाणु शस्त्र दाग़ने में कितना सक्षम हुआ है.

बीबीसी के सामरिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि हालाँकि पिछले दिनों उत्तर कोरिया का लंबी दूरी का मिसाइल परीक्षण असफल रहा था.

लेकिन उसके पास कुछ पुराने सोवियत मिसाइल हैं जो 1950 के दशक के परमाणु बम को ले जा सकते हैं.

पृष्ठभूमि

उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर 90 के दशक के शुरू में तनाव बढ़ना शुरू हुआ था. उस समय उत्तर कोरिया ने अपने दो परमाणु ठिकानों की जाँच से मना कर दिया था.

इन परमाणु ठिकानों के बारे में कोई विवरण नहीं था और कहा जा रहा था कि इन ठिकानों में परमाणु कचरा रखा गया है.

इसके तुरंत बाद उत्तर कोरिया ने अपने को परमाणु अप्रसार संधि से भी अलग कर लिया. हालाँकि बाद में उत्तर कोरिया ने अमरीका के साथ एक समझौता किया.

इस समझौते के मुताबिक़ उसने अपने परमाणु कार्यक्रमों पर रोक लगाने और आख़िरकार उसे पूरी तरह ख़त्म करने का वादा किया.

बदले में उसे परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए सहायता मिलनी थी. लेकिन यह समझौता कभी भी लागू नहीं हो पाया.

वर्ष 2002 में अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने उत्तर कोरिया को 'दुष्ट राष्ट्रों की धुरी' में शामिल देश बताया. उसी वर्ष अमरीका और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को तेल की आपूर्ति बंद कर दी.