शनिवार, 07 अक्तूबर, 2006 को 12:19 GMT तक के समाचार
ईरान को मनाने की कोशिश कर रहे दुनिया के छह बड़े देशों ने निराशा व्यक्त कि है कि ईरान अपना यूरेनियम संबर्धन का काम रोकने को राज़ी नहीं है.
ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना पर लंदन में एक बैठक में विचार करने के बाद इन छह देशों ने यह यह बयान दिया है.
इस बीच अमरीका के विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अगले हफ़्ते से काम शुरु होगा.
वैसे अमरीकी विदेश मंत्री रविवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मिलकर इस पर और चर्चा करने वाली हैं.
ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को रोकने से लगातार इनकार करता रहा है.
अमरीका और कुछ यूरोपीय देश मानते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है जबकि ईरान का कहना है कि उसका पूरा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए हैं.
रुस ख़िलाफ़
इस बैठक में अमरीका, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी, फ़्रांस और रुस के विदेश मंत्री उपस्थित थे.
हालांकि इन छह देशों के बीच इस बात को लेकर विरोधाभास बना हुआ है कि ईरान के मसले को किस तरह से देखा जाए.
निकोलस बर्न्स ने साफ़ संकेत दे दिए हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध के लिए प्रस्ताव तो आना ही है.
लेकिन उन्होंने कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि जिस प्रस्ताव को वोट के लिए रखा जाएगा उसमें किस तरह के प्रतिबंधों का ज़िक्र किया जाएगा.
ख़ासकर रुस ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई के ख़िलाफ़ है.
चीन और रूस कहते रहे हैं कि इस मसले के समाधान के लिए कूटनीति ही सबसे बेहतर तरीका है.
इससे पहले गुरुवार को रूस के विदेशमंत्री सरगई लावरोव कह चुके हैं कि प्रतिबंधों को अत्यधिक चिंताजनक स्थिति पैदा होने पर ही लगाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि वो अन्य विकल्पों पर भी विचार करना चाहेंगे ताकि बहुदलीय कूटनीतिक प्रयासों को और आगे बढ़ाया जा सके.