गुरुवार, 05 अक्तूबर, 2006 को 20:36 GMT तक के समाचार
अमरीका का कहना है कि ये ज़रूरी है कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियार न बनाए लेकिन उसके प्रस्तावित परमाणु परीक्षण पर अमरीका का मकसद कोई 'घातक चेतावनी' जारी करना नहीं था.
उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षण करने की घोषणा पर पहले अमरीका के वरिष्ठ दूत क्रिस्टोफ़र हिल ने कहा था कि उत्तर कोरिया या तो भविष्य चुन ले या फिर परमाणु हथियार.
इसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता टोनी स्नो ने कहा कि ये अत्यंत ज़रूरी है कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियार न बनाए.
उनका कहना था कि अमरीका संयुक्त राष्ट्र और उत्तर कोरिया के पड़ोसी देशों के ज़रिए, उत्तर कोरियाई सरकार पर दबाव आवश्य बना रहा है लेकिन ऐसा प्रयास नहीं कर रहा कि वहाँ की सरकार गिर जाए.
रूस ने संपर्क साधा
उधर रूस का कहना है कि उसने उत्तर कोरियाई नेतृत्व से सीधा संपर्क साधा है ताकि उसे प्रस्तावित परमाणु परीक्षण न करने के लिए मना लिया जाए.
रूसी विदेश मंत्री सर्गे लवरोव ने परमाणु अप्रसार पर बल देते हुए कहा कि भावनाओं में बहकर इस मुद्दे को धुँधला नहीं करना चाहिए.
उत्तर कोरिया की घोषणा के बाद अमरीका ने कहा था कि वह परमाणु हथियार संपन्न उत्तर कोरिया को स्वीकार नहीं करेगा.
उत्तर कोरिया की इस घोषणा की दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी निंदा हुई थी.
रूस और दक्षिण कारिया ने साझा बयान में कहा है कि उन्हें उत्तर कोरिया का परमाणु परीक्षण स्वीकार्य नहीं है.
इसके अलावा जापान और चीन ने भी इस घोषणा की आलोचना की.
संयुक्त राष्ट्र में मतभेद
अमरीका चाहता है कि उसके सहयोगी इस परमाणु परीक्षण के ख़िलाफ़ एक संयुक्त मोर्चा बनाकर विरोध करें.
लेकिन संयुक्त राष्ट्र में इस पर चर्चा अधूरी ही रही है. संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी प्रतिनिधि जॉन बॉल्टन ने कहा कि अभी इस पर मतभेद हैं.
क्रिस्टोफ़र हिल ने कहा था, "उत्तर कोरिया एक महत्वपूर्ण दोराहे पर आ खड़ा हुआ है जहाँ उसे परमाणु हथियार और अपने भविष्य में से एक को चुनना होगा. वह दोनों को नहीं चुन सकता."
उन्होंन कहा था, "मैं इस समय यह बताने की स्थिति में नहीं हूँ कि हम क्या करेंगे लेकिन यह मैं ज़रूर कह सकता हूँ कि हम उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार संपन्न हो जाने का इंतज़ार नहीं करेंगे. यह हमें स्वीकार्य नहीं है."