गुरुवार, 28 सितंबर, 2006 को 07:52 GMT तक के समाचार
जून 1985 में एयर इंडिया के कनिष्क विमान धमाके की व्यापक जाँच में राहतकर्मियों ने अपने बयान में बचाव कार्यों के दौरान अपने दुखद अनुभवों की बात की है.
कनाडा से भारत की उड़ान भर रहा एयर इंडिया का विमान धमाके में ध्वस्त हो गया था और उस पर सवार 329 यात्री और चालक दल के सदस्य मारे गए थे.
कनाडा के ही नागरिक रिपुदमन सिंह मलिक और अजायब सिंह बागड़ी पर इस मामले में लंबे समय तक मुकदमा चला और मार्च 2005 में उन्हें बरी कर दिया गया था.
इस धमाके में मारे गए लोगों के परिजनों ने इस पर नाराज़गी जताई थी और व्यापक जाँच की माँग की थी.
बाद में कनाडा की संसद में विपक्ष की माँग और मतदान के बाद ही व्यापक जाँच की माँग मानी गई थी.
क्या कोताही हुई?
सोमवार को ये जाँच शुरु हुई और सबसे पहले इससे प्रभावित लोगों यानि मृतकों के परिजनों और हादसे के कुछ ही देर बाद घटनास्थल पर पहुँचे प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सुने गए.
बचाव दल के ज़्यादातर लोग आयरलैंड या ब्रिटेन के थे और उन्होंने भावुक होकर अपने व्यक्तिगत अनुभव सुनाए हैं.
मार्क स्टैग उन अधिकारियों में से थे जो सबसे पहले अटलांटिक महासागर में बिखरे विमान के मलबे तक पहुँचे.
उनका कहना था कि मीलों मील तक ये मानवीय त्रासदी ही नज़र आ रही थी. उन्होंने पानी से मानव अवशेष निकालने का मुश्किल काम बयान करते हुए कहा कि वे अब भी उस अनुभव से उभर नहीं पाए हैं.
उनका कहना था, "हर रोज़ मेरा दिमाग वहीं खिंचा चला जाता है. उस दिन अच्छाई और भगवान में मेरा विश्वास और स्थिति समान्य होने की मेरा भावना मर गई."
चाहे ये जाँच पिछले न्यायिक फ़ैसले में दख़ल तो नही दे सकती लेकिन ये जाँच ये ज़रूर सुनिश्चित कर सकती है कि क्या कनाडा के प्रशासन में पिछली जाँच में कोई कोताही हुई.