मंगलवार, 26 सितंबर, 2006 को 03:31 GMT तक के समाचार
जुनिचिरो कोईज़ुमी के इस्तीफ़े के बाद जापानी संसद के निचले सदन ने पूर्व मुख्य कैबिनेट सचिव शिंज़ो आबे को अगला प्रधानमंत्री नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है.
आबे नए कैबिनेट सहयोगियों की सूची तैयार कर उसे राजा आकिहितो के समक्ष पेश करेंगे.
इससे पहले जूनिचिरो कोईज़ुमी की सरकार ने इस्तीफ़ा देकर आबे के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया.
आबे हाल ही में भारी बहुमत से सत्तारुढ़ लिबरल डेमोक्रैटिक पार्टी के अध्यक्ष चुने गए हैं.
52 वर्षीय आबे दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान के सबसे युवा प्रधानमंत्री होंगे.
आबे चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर जापान की पहचान को मजबूती से रखा जाए.
उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन और दक्षिण कोरिया के साथ रिश्तों में सुधार लाने की होगी.
वह कोईज़ुमी के आर्थिक उदारीकरण कार्यक्रम का समर्थन करते रहे हैं लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक अमीर-ग़रीब के बीच बढ़ती खाई को पाटने के मुद्दे पर दबाव में आ सकते हैं.
कोईज़ुमी और भारत
कोईज़ुमी के कार्यकाल में भारत और जापान के बीच संबंधों में तेज़ी आई और दोनों ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधार के लिए मिल कर आवाज़ बुलंद की.
दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के दावेदार हैं. इस सिलसिले में चार देशों-जापान, भारत, ब्राजील और जर्मनी- का समूह (जी-4) बनाने में कोईज़ुमी ने अहम भूमिका निभाई.
हालाँकि यासुकूनी युद्ध स्मारक पर उनकी यात्रा ने नए विवादों को जन्म दिया. चीन और दक्षिण कोरिया ने उनके इस क़दम की आलोचना की.
यह स्मारक विवादित इसलिए भी है क्योंकि जिन लोगों के सम्मान में यह बना है उनमें से कई लोगों को युद्ध अपराध के लिए दोषी माना गया.