शुक्रवार, 22 सितंबर, 2006 को 13:00 GMT तक के समाचार
इसराइल को मान्यता देने के मुद्दे पर फ़लस्तीनियों में मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं.
एक तरफ़ तो फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा है कि नई फ़लस्तीनी सरकार इसराइल को मान्यता दे सकती है.
लेकिन हमास के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा है कि अगर ऐसी बात है तो हमास नई गठबंधन फ़लस्तीनी सरकार में शामिल नहीं होगा.
ग़ौरतलब है कि हमास इसराइल के अस्तित्व को मान्यता नहीं देता है और इसराइल उसे चरमपंथी संगठन मानता है.
येरूशलम में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि यही वो सबसे अहम मुद्दा जिसकी वजह से राष्ट्रीय एकता वाली एक फ़लस्तीनी सरकार के गठन पर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है.
पश्चिमी देशों ने कहा है कि राष्ट्रीयता एकता वाली फ़लस्तीनी सरकार पहले इसराइल को मान्यता देगी तभी सहायता राशि फिर से शुरू की जाएगी जिसकी फ़लस्तीनी प्रशासन को बेहद सख़्त ज़रूरत है.
महमूद अब्बास ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि उनका विश्वास है कि प्रस्तावित फ़लस्तीनी राष्ट्रीय एकता की सरकार मध्यस्थ देशों की माँग को मान लेगी और इसराइल को मान्यता दे देगी.
हमास के एक वरिष्ठ पदाधिकारी अहमद यूसुफ़ ने महमूद अब्बास के वक्तव्य वर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर यह क़ीमत चुकानी पड़ेगी तो राष्ट्रीयता एकता वाली कोई सरकार नहीं बनेगी.
मध्यस्थ देशों की माँग है कि फ़लस्तीनी प्रशासन इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार करके शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की ओर क़दम बढ़ाए तभी फ़लस्तीनी राष्ट्र का निर्माण संभव है.
अमरीका, यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र और रूस ने इसी सप्ताह कहा था कि फ़लस्तीनियों को सहायता राशि बहाल करने के लिए इसराइल को मान्यता दिया जाना ज़रूरी है.
इस समय फ़लस्तीनी इलाक़े में चरमपंथी संगठन हमास के नेतृत्व वाली सरकार है जो इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार करने को तैयार नहीं है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि फ़लस्तीनी क्षेत्रों ग़ज़ा और पश्चिमी तट में हालात बहुत ख़राब हैं और ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सभी पक्ष कोई रास्ता निकालना चाहते हैं या फिर इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिरोध इसी तरह बना रहेगा.