गुरुवार, 21 सितंबर, 2006 को 17:45 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र के प्रताड़ना विरोधी अधिकारी मैनफ्रेड नोवाक ने कहा है कि इराक़ में लोगों को प्रताड़ित किए जाने की स्थिति पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के शासनकाल से भी बदतर नज़र आती है.
मैनफ्रेड नोवाक ने गुरूवार को कहा कि इराक़ में स्थिति "नियंत्रण के बाहर है" और सुरक्षा बलों, मिलिशिया गुटों और अमरीका विरोधी विद्रोहियों के हाथों प्रताड़ना के मामले सामने आ रहे हैं.
इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के सहायता मिशन के मानवाधिकार दफ़्तर का कहना है कि बग़दाद में शवगृह में लाए जाने शवों पर "अक्सर बहुत प्रताड़ना के निशान" होते हैं.
मैनफ्रेड नोवा ने जिनेवा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि शवों पर जो ज़ख़्मों के निशान होते हैं उनसे उन लोगों की बातों की पुष्टि होती है जो इराक़ से बाहर जाने वाले लोग देते हैं.
नोवाक ने कहा कि वह अभी इराक़ का दौरा करेंगे लेकिन फिलहाल उन्होंने जॉर्डन में इराक़ियों से जो बातचीत की है और पोस्टमॉर्टम की रिपोर्टों के आधार पर जिस नतीजे पर पहुँचे हैं वो पत्रकारों से बाँट रहे हैं.
ऑस्ट्रिया के विधि प्रोफ़ेसर नोवाक ने कहा, "इराक़ में प्रताड़ना से संबंधित स्थिति के बारे में जो ज़्यादातर लोग जानकारी देते हैं उससे यही मतलब निकलता है कि वहाँ स्थिति क़ाबू से बाहर है."
उन्होंने कहा, "स्थिति इतनी ख़राब हो चुकी है कि बहुत से लोग कहते हैं कि यह सद्दाम हुसैन के शासन काल से भी बदतर हो चुकी है."
क्रूर तरीके
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदियों के शरीरों पर अक्सर बिजली के तार से पिटाई, सिर और गुप्तांगों में ज़ख़्म, हाथ और टांगों की हड्डियों के टूटने, बिजली के झटके दिए जाने और सिगरेटों से जलाए जाने के निशान नज़र आते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से शवों की त्वचा ग़ायब होती है, कमर, हाथ और टांगों की हड्डियाँ टूटी हुई होती हैं, आँखें, दाँत ग़ायब होते हैं और ऐसे ज़ख़्म होते हैं जैसेकि नाख़ूनों या दीवारों में सुराख़ करने वाली ताक़तवर मशीन से किए गए हों.
रिपोर्ट कहती है कि प्रताड़ित लोग या शव ऐसी जेलों से आते हैं जो अमरीकी नेतृत्व वाली बहुराष्ट्रीय सेना, इराक़ के आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालयों और कुछ मिलिशिया गुटों के नियंत्रण में हैं.
नोवाक ने पत्रकारों को बताया कि प्रताड़ना के सबसे ज़्यादा क्रूर तरीके मिलिशिया गुटों ने अपनाए हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जातीय हिंसा में जो तरीके अपनाए जाते हैं उनमें शवों पर ऐसे निशान पाए जाते हैं जिनसे पता चलता है कि लोगों को ग़ैरन्यायिक तरीक़े से मारने से पहले उन्हें क्रूर तरीके से प्रताड़ित किया गया.
रिपोर्ट निष्कर्ष देती है कि प्रताड़ना की वजह से देश की राष्ट्रीय पहचान के लिए ख़तरा पैदा हो गया है क्योंकि प्रभावित होने वाले लोग अपना बदला ख़ुद लेने की कोशिश करते हैं जिससे हिंसा और फैलती है.
नोवाक ने कहा है कि वह ख़ुद इराक़ जाकर स्थिति का जायज़ा लेना चाहते हैं लेकिन हालात उन्हें सटीक रिपोर्ट तैयार करने की इजाज़त नहीं देंगे क्योंकि बग़दाद जाकर भी भारी सुरक्षा वाले ग्रीन ज़ोन से बाहर जाना मुश्किल होगा.
ग्रीन ज़ोन में ही इराक़ी सरकार और अमरीकी दफ़्तर स्थिति हैं और वहाँ भारी सुरक्षा बंदोबस्त रहता है.