मंगलवार, 19 सितंबर, 2006 को 03:09 GMT तक के समाचार
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई ने कहा है कि इस्लाम पर पोप का ताज़ा बयान मुसलमानों के ख़िलाफ़ 'धर्मयुद्ध' से जुड़ा हुआ है.
उन्होंने कहा कि इस विवाद की पृष्ठभूमि में 'उन शक्तियों की इच्छा थी जिनका अस्तित्व संकट खड़ा करने पर ही निर्भर' करता है.
पिछले हफ़्ते यह विवाद शुरू हुआ था जब पोप बेनेडिक्ट 16वें ने एक मध्यकालीन राजा की उन उक्तियों को उद्धृत किया, जिनमें मोहम्मद साहब की आलोचना की गई थी.
पोप के भाषण के बाद दुनिया भर में मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन किए. बाद में पोप ने इस विवाद पर माफ़ी मांगी और कहा कि वो विचार उनके अपने नहीं थे.
ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता ख़ामेनेई ने कहा कि पोप का बयान उस सिलसिले की ताज़ा कड़ी है जिसमें 'धर्मयुद्ध' की साज़िश रची जा रही है.
ताज़ा कड़ी
उन्होंने इस शृंखला में अन्य कड़ियों का भी ज़िक्र किया. जिनमें मोहम्मद साहब के कार्टून और इस्लाम के बारे में अमरीकी और यूरोपीय राजनेताओं के साथ-साथ अख़बारों की अपमानजनक टिप्पणी शामिल है.
उन्होंने कहा, "हम अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से कोई अपेक्षा नहीं करते क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय लुटेरी कंपनियों और शक्तियों के लिए काम करते हैं."
अयातुल्ला अली ख़ामेनेई ने कहा कि पोप का बयान आश्चर्यजनक और अफ़सोस वाली बात है. ख़ामेनेई के अलावा क़तर के मुस्लिम विद्वान युसूफ़ अल क़रादावी ने भी पोप के खेद वाले बयान को ठुकराते हुए कहा कि पोप को अपना बयान वापस लेना चाहिए था.
हमास के प्रवक्ता सामी अबू ज़ुहरी ने भी कहा है कि पोप का बयान माफ़ी नहीं थी. सोमवार को भी पोप के ख़िलाफ़ कई मुस्लिम देशों में प्रदर्शन जारी रहे.
भारत प्रशासित कश्मीर में कई स्कूल और दूकानें बंद रहीं. इराक़ और इंडोनेशिया में भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए. सीरिया की राजधानी दमिश्क में एक विरोध रैली का आयोजन किया गया.