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शुक्रवार, 15 सितंबर, 2006 को 14:44 GMT तक के समाचार

पोप के बयान पर प्रतिक्रियाएँ

पोप बेनेडिक्ट की टिप्पणी पर मुसलिम देशों के राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रियाएँ दी हैं. प्रस्तुत हैं ऐसी ही कुछ प्रतिक्रियाएँ:

पाकिस्तानी संसद
पैगंबर मुहम्मद साहब और जेहाद के फ़लसफे पर पोप की टिप्पणी से मुसलिम जगत की भावनाएं आहत हुईं हैं. इस टिप्पणी से विभिन्न धर्मों के बीच विवाद फैलने का खतरा पैदा हो गया है.

हामिद अंसारी, भारतीय अल्पसंख्यक समिति के अध्यक्ष
पोप ने अपने भाषण में जिस तरह की भाषा का उपयोग किया है उसे सुनकर लगता है कि वे 12 वीं सदी के कट्टरवादियों में से एक हैं जिन्होंने ईसा को सूली पर चढ़ाने का हुक्म दिया था. मुझे इस टिप्पणी को सुन बेहद आश्चर्य हुआ क्योंकि वेटिकन सिटी और मुसलिम जगत के संबंध काफी अच्छे हैं.

दीन शम्सुद्दीन, इंडोनेशिया की दूसरे सबसे बड़े संगठन मोहम्मद के प्रमुख
पोप की टिप्पणी उनमें विवेक की कमी को जाहिर करती है. पोप की टिप्पणी से समझा जा सकता है कि वे इस्लाम धर्म की अवधारणाओं की सही जानकारी नहीं रखते हैं.

मुहम्मद मएहदा अकीफ, इजिप्शियन मुसलिम ब्रदरहुड
पोप का बयान साबित करता है कि वे इसलाम की सही समझ नहीं रखते हैं. पश्चिमी देशों के द्वारा इस्लाम की बार-बार गलत व्याख्या की जा रही है.

शेख यूसूफ अल क़रदावी, क़तर के मुस्लिम धार्मिक नेता
ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु की ओर से हुई इस टिप्पणी से मुसलमानों की भावनाएं आहत हुईं हैं और हमें नाराज होने का पूरा हक है. हम चाहते हैं कि पोप इस्लाम धर्म और पैंगबर की बेज्जती के लिए मुसलिम जगत से माफी मांगे.

अली बारदाकग्लू, वरिष्ठ तुर्की नागरिक
मुझे नहीं लगता कि ऐसे किसी भी व्यक्ति के मुस्लिम देशों का दौरा करने से कोई फायदा होगा जो पैंगबर मुहम्मद साहब और इस्लाम धर्म के बारे में इस तरह के विचार रखता हो. उसे सबसे पहले आत्म विश्लेषण करना चाहिए और नफ़रत की भावना से दूर रहना चाहिए.

इस्लामी सम्मेलन संगठन का वक्तव्य
हमें उम्मीद है कि पोप का तात्कालिक बयान इस्लाम के प्रति वैटिकन सिटी की नई प्रवृत्ति को बयान नहीं करता है. हम चाहते हैं कि वेटिकन इस्लाम के प्रति अपनी सही भावनाओं को व्यक्त करें.

डा. मुहम्मद अब्दुल बारी, ब्रिटिश मुसलिम काउंसिल
पोप जैसे धर्म के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने दायित्वों को समझे, दूसरे धर्मों की इज्जत करें. उनका हर कथन सच और मानवीयता से भरा होना चाहिए. पोप ने इन बातों का पालन नहीं किया...उनके कथन ने हमें बेहद आहत किया है.