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शुक्रवार, 15 सितंबर, 2006 को 14:41 GMT तक के समाचार

पोप बेनेडिक्ट और विवाद!

वेटिकन के प्रवक्ता ने तुरंत एक बयान जारी कर कहा है कि पोप बेनेडिक्ट ने अपने बयान में छह सौ साल पहले के एक राजा का बयान पढ़ा था, उससे वे किसी का निरादर नहीं करना चाहते थे.

वह एक धर्मगुरु और एक दार्शनिक की हैसियत से अपनी बात कहना चाहते थे, जर्मनी के रेगेन्सबर्ग विश्वविद्यालय में वे लोगों को ये कह रहे थे कि धर्म का प्रचार प्रेम के रास्ते हो सकता है, हिंसा के रास्ते से नहीं.

वेटिकन में शुक्रवार को महत्वपूर्ण दिन रहा जबकि वेटिकन के दूसरे सबसे वरिष्ठ धार्मिक नेता कार्डिनल तार्सीशियो बर्तोनी ने अपना पद संभाला.

पोप का ध्यान भी इसमें लगा रहा.

रोम से बीबीसी संवाददाता डेविड विली का कहना है कि बताया जा रहा है कि पोप अपने बयान पर उठे विवाद से खिन्न हैं, लेकिन वेटिकन में कोई घबराहट का माहौल भी नहीं है.

पोप की नवंबर में होने वाली तुर्की यात्रा के कार्यक्रम को बदलने पर भी कोई विचार नहीं हो रहा है.

बीबीसी संवाददाता राहुल टंडन का कहना है कि ये पहली बार नहीं है जब पोप बेनेडिक्ट का नाम इस्लाम से जुड़े विवाद में आया हो.

उनसे पहले पोप रहे पोप जॉन पॉल द्वितीय वर्ष 2001 में सीरिया में एक मस्जिद में गए थे और किसी मस्जिद में जाने वाले वह पहले पहले पोप थे, लेकिन तब ये ख़बरें आती रहती थीं कि उनके के कई क़दमों से तब कार्डिनल रहे बेनेडिक्ट खुश नहीं थे.

तब उनका नाम भी बेनेडिक्ट नहीं कार्डिनल रैत्ज़िंगर था और वो ये नहीं चाहते थे कि तुर्की यूरोपीय संघ में शामिल हो.

उनका कहना था कि तुर्की एक दूसरे सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाला देश है और उसे यूरोपीय संघ में शामिल करना एक गंभीर भूल होगी.

1996 में उन्होंने ये भी कहा कि इस्लाम को आधुनिक जीवनशैली के साथ संतुलन बिठाने में काफ़ी दिक्कतें होती हैं.

पोप बनने के बाद से पोप बेनेडिक्ट ने इस्लामी दुनिया के साथ संवाद बढ़ाने के लिए कई क़दम उठाए हैं और उनकी तुर्की यात्रा भी इसी कोशिश का हिस्सा है.

लेकिन पिछले साल उन्होंने जर्मनी के मुस्लिम नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा था कि "वो मुस्लिम युवाओं को बर्बरता के अंधकार से बाहर नहीं निकाल पा रहे हैं."