शुक्रवार, 15 सितंबर, 2006 को 00:17 GMT तक के समाचार
पोप बैनेडिक्ट के इस्लाम और पवित्र युद्ध या जेहाद पर दिए गए एक बयान को लेकर मुस्लिम नेता गंभीर रुप से नाराज़ हैं.
रोमन कैथोलिक चर्च की सफ़ाई के बावजूद उनकी नाराज़गी कम नहीं हुई है.
वेटिकन के प्रवक्ता फ़ादर फ़ेडेरिको लोम्बार्डी ने कहा है कि पोप का उद्देश्य इस्लाम का अपमान करना नहीं था बल्कि वे विभिन्न धर्मों के बीच सम्मान की भावना जगाने की कोशिश कर रहे थे.
फ़ादर लोम्बार्डी ने कहा है कि जब पोप ने छह सदी पहले एक ईसाई राजा के कहे हुए को दोहराया तो उनका उद्देश्य इस्लाम के पवित्र युद्ध या जेहाद का छिद्रांवेषण करना नहीं था.
पोप जर्मनी में अपने गृह नगर के प्रवास पर थे और वहाँ उन्होंने चौदहवीं शताब्दी के ईसाई राजा के हवाले से कहा था कि मोहम्मद पैगम्बर के इस संदेश ने कि तलवार के दम पर धर्म का प्रचार किया जाए दुनिया को केवल 'दुष्टता और अमानवीयता' दी.
विरोध
उनके इस बयान के बाद से तुर्की में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है. तुर्की पहला मुस्लिम देश है जहाँ पोप नवंबर में जाने वाले हैं.
तुर्की के एक वरिष्ठ मौलवी ने पोप के बयान के बारे में कहा है, "पोप का बयान अत्याधिक चिंताजनक, दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है."
उन्होंने कहा है कि इससे वे बुरी तरह से आहत हुए हैं.
इस तरह की टिप्पणियाँ मिस्र और सऊदी अरब से भी आई हैं.
अली बार्तोकोगलु ने कहा है, "इस्लाम नहीं बल्कि ईसाइयत का प्रचार बल पूर्वक किया जाता रहा है."
जबकि पाकिस्तान के इस्लाम के विद्वान जावेद अहमद ने पोप के बयान को ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बताया है.
लेकिन वेटिकन का कहना है कि पोप के बयान को ग़लत ढंग से प्रचारित किया गया.