गुरुवार, 07 सितंबर, 2006 को 09:14 GMT तक के समाचार
दस साल की उम्र में अपहरण के बाद आठ साल एक छोटी कोठरी में बिताने वाली ऑस्ट्रियाई लड़की ने पहली बार मीडिया को अपने अनुभव बताए हैं.
टेलीविज़न और अख़बारों को दिए गए साक्षात्कारों में नताशा कैंपुश ने कहा है कि वह हमेशा निकल भागने के बारे में सोचती रही और अपने अपहरणकर्ता की हत्या कर देने के सपने देखती रही.
1998 में स्कूल जाते समय नताशा ग़ायब हो गई थी.
नताशा की इस कहानी में अपहरण है, क़ैद है और निकल भागने का विवरण है.
उसका कहना है कि अपनी बेसमेंट की अपनी कोठरी में वह 'परेशान और नाराज़' थी लेकिन उसके अपहरणकर्ता ने उससे कह रखा था कि यदि वह भागने की कोशिश करेगी तो वह उसकी जान ले लेगा.
उसके अपहरण के बाद पुलिस बहुत कोशिशों के बाद भी उसे नहीं ढूढ़ पाई थी.
लेकिन दो हफ़्तों पहले वह अपहरणकर्ता के चंगुल से निकल भागने में सफल रही और पुलिस के पास जाकर उसने कहा, "मैं नताशा कैंपुश हूँ."
नताशा के अपहर्ता वोल्फ़गैंग ने उसके निकल भागने के बाद आत्महत्या कर ली.
नताशा की हताशा
नताशा जब पुलिस के पास पहुँची थी तब पुलिस के पास उसकी कोई तस्वीर नहीं थी. लेकिन जींस, बैंगनी टॉप पहने और सर पर स्कार्फ़ बाँधी लड़की अपना पूरा अनुभव सुनाने को तत्पर थी.
बुधवार को एक दैनिक अख़बार ने, एक साप्ताहिक पत्रिका ने उसकी फ़ोटो के साथ उसका साक्षात्कार प्रकाशित किया और ऑस्ट्रिया के सरकारी टेलीविज़न चैनल ने उसका साक्षात्कार प्रसारित किया तो लाखों लोगों को उसके बारे में पता चला.
अंधेरी कोठरी में सालों-साल रहने के कारण नताशा की आँखें रोशनी की अभ्यस्त नहीं हुई हैं और टेलीविज़न में साक्षात्कार के दौरान वह बार-बार आँखें झपकाती रही.
उसके बताया कि किस तरह उसने आवाज़ लगाई, चीख़ती रही लेकिन आवाज़ बाहर ही नहीं गई.
नताशा ने बताया कि वह अक्सर सपने देखा करती थी कि उसके पास कुल्हाड़ी आ जाए तो वह अपने अपहरणकर्ता का सर काट दे.
साक्षात्कार के दौरान उसने एक बार यह भी कहा कि उससे अपहरणकर्ता के बारे में ज़्यादा बात न की जाए क्योंकि वह एक मर चुके आदमी के बारे में बात नहीं करना चाहती.
प्रेस को दिए साक्षात्कार के बदले उसे मकान और स्थाई नौकरी देने का आश्वासन दिया गया है.