रविवार, 27 अगस्त, 2006 को 20:44 GMT तक के समाचार
हिज़्बुल्ला के प्रमुख शेख़ हसन नसरल्ला ने खेद जताते हुए कहा है कि यदि उन्हें भीषण युद्ध का अंदेशा होता तो वे दो इसराइली सैनिकों को बंधक ही नहीं बनाते.
उन्होंने लेबनान के एक टेलीविज़न चैनल को दिए गए साक्षात्कार में यह खेद जताया है.
दो हफ़्ते पहले इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच हुए युद्ध विराम के बाद नसरल्ला ने पहली बार इस मसले पर विस्तृत साक्षात्कार दिया है.
उन्होंने यह भी बताया कि इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच क़ैदियों की अदला-बदली के लिए चर्चा शुरु हो चुकी है.
उल्लेखनीय है कि गत 12 जुलाई को दो इसराइली सैनिकों का हिज़्बुल्ला के सैनिकों ने अपहरण कर उन्हें बंधक बना लिया था.
इसके बाज इसराइल ने लेबनान पर हमला कर दिया था और हिज़्बुल्ला ने जवाबी कार्रवाई शुरु कर दी थी.
35 दिनों के भीषण युद्ध और भारी तबाही के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हस्तक्षेप से दो हफ़्ते पहले युद्धविराम हुआ है.
अपने साक्षात्कार में शेख़ हसन नसरल्ला ने कहा, "यदि हमें पता होता कि दो इसराइली सैनिकों के अपहरण से ऐसा युद्ध भड़क जाएगा तो हम निश्चित तौर पर ऐसा नहीं करते."
उन्होंने कहा, "हमने नहीं सोचा था कि ऐसी प्रतिक्रिया की संभावना एक प्रतिशत भी हैं."
उन्होंने कहा कि कोई भी पक्ष लड़ाई के दूसरे चरण की ओर नहीं बढ़ रहा है.
हालांकि नसरल्ला ने सैनिकों को बंदी बनाने के लिए कोई खेद नहीं जताया है और उनका खेद सिर्फ़ इस अपहरण से हुई प्रतिक्रिया को लेकर है.
हालांकि अरब देश इस पूरे मामले में हिज़्बुल्ला के साथ खड़े दिख रहे थे लेकिन लेबनान में इसकी व्यापक प्रतिक्रिया हुई है.
बीबीसी के विश्व मामलों के संवाददाता क्रिस मॉरिस का कहना है कि यह खेद लेबनानी लोगों को संतुष्ट करने के लिए जताया गया है.
नसरल्ला ने यह बयान ऐसे समय में दिया है जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान दक्षिणी लेबनान में शांति सैनिकों की तैनाती पर चर्चा करने के लिए बेरूत पहुँचने वाले हैं.