शनिवार, 26 अगस्त, 2006 को 03:28 GMT तक के समाचार
बुधवार एम्सटर्डम में हिरासत में लिए जाने के बाद, रिहा होकर शनिवार तड़के मुंबई पहुँचे यात्रियों ने राहत की साँस ली है. इनमें से कई नीदरलैंड के प्रशासन की कार्रवाई को ग़ैर-वाजिब ठहराते हैं.
इन यात्रियों पर संदेह होने के बाद इन्हें हथकड़ी लगाई गई, आपस में कोई बातचीत नहीं करने दी गई, अलग-अलग गाड़ियों में ले जाकर चार फ़ीट लंबे और चार फ़ीट चौड़े अलग-अलग कमरों में रखा गया.
बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद के साथ बातचीत में इनमें से कुछ यात्रियों ने कहा कि वे थके हुए थे और यदि 'अपनी सुविधा अनुसार सीटें भी बदल रहे थे तो ये कोई गुनाह तो नहीं है.'
पहले ख़बरें आ रही थीं कि कुछ यात्री मोबाइल एक दूसरे को दे रहे थे जिससे उनके बारे में चालक दल को संदेह हुआ. लेकिन यात्रियों ने इससे इनकार किया और कहा कि उन्होंने सीट बेल्ट भी लगा रखे थे.
'महज़ एक ग़लती थी'
इनमें से कुछ यात्रियों का कहना था कि जब उन्हें हथकड़ी लगाई गई तो पूछने पर भी कोई कारण नहीं बताया गया.
समाचार माध्यमों के अनुसार, एक यात्री मोहम्मद इक़बाल बाटलीवाला का कहना था, "ये सब एयर लाइन की ओर से महज़ एक ग़लती थी जो बाद में दूर हो गई. हमारे साथ कोई बुरा बर्ताव नहीं हुआ."
कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें कोई यातनाएँ नहीं दी गईं और जब उन्होंने भारतीय दूतावास के किसी भी प्रतिनिधि से मिलने की इच्छा ज़ाहिर की तो कुछ ही घंटे बाद दूतावास के एक अधिकारी उनसे आकर मिले.
एक अन्य यात्री सोहेल अज़ीज़ का कहना था, "ये बहुत ही अपमानजनक अनुभव था. हमें हथकड़ी लगाकर ले जाया गया और छोटे-छोटे कमरों में रखकर पूछताछ की गई."
लेकिन इन लोगों में से किसी ने भी नीदरलैंड के प्रशासन या फिर एयर लाइन के ख़िलाफ़ फ़िलहाल किसी तरह की क़ानूनी कार्रवाई करने से इनकार किया.