शुक्रवार, 25 अगस्त, 2006 को 12:16 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन की जनसंख्या ने इतिहास में पहली बार छह करोड़ का आँकड़ा पार किया है.
ब्रिटेन के सांख्यिकी विभाग से जारी ताज़ा आँकड़ों के अनुसार जून 2005 में समाप्त हुए वर्ष में 0.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ब्रिटेन की जनसंख्या छह करोड़ दो लाख हो गई.
इसमें से इंग्लैंड की आबादी पाँच करोड़ चार लाख है.
1962 के बाद से ब्रिटेन की जनसंख्या में राष्ट्रीय स्तर पर यह सबसे बड़ी वृद्धि है जो यूरोपीय संघ के अन्य देशों से ब्रिटेन में आने वाले लोगों की वजह से दर्ज हुई है.
साथ में ब्रिटेन में उम्रदराज़ लोगों की संख्या भी काफ़ी है क्योंकि ब्रिटेन में औसत आयु काफ़ी ज़्यादा है.
ब्रिटेन में औद्योगिक क्रांति के बाद से जनसंख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है. 1911 में ब्रिटेन में की जनसंख्या चार करोड़ बीस लाख थी.
उत्तरी आयरलैंड में जनसंख्या वृद्धि 0.8 प्रतिशत दर्ज की गई जो सबसे ज़्यादा रही. इंग्लैंड की जनसंख्या 0.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी, स्कॉटलैंड में जनसंख्या वृद्धि दर 0.3 प्रतिशत और वेल्स में सबसे कम 0.2 प्रतिशत रही.
सांख्यिकी विभाग का कहना है कि जून 2005 में स्कॉटलैंड की जनसंख्या 51 लाख, वेल्स की 30 लाख और उत्तरी आयरलैंड की जनसंख्या 17 लाख थी.
अगली पीढ़ी तक ब्रिटेन की जनसंख्या में 12 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. 30 जून 2005 को समाप्त हुए एक वर्ष में इस जनसंख्या में तीन लाख 75 हज़ार लोगों का इज़ाफ़ा हुआ.
जन्म दर बढ़ी
इन आँकड़ों में दिखाया गया है कि जन्म दर बढ़ी है और मृत्यु दर में कमी आई है.
ब्रिटेन में जून 2005 तक 85 साल से ज़्यादा उम्र के क़रीब ग्यारह लाख 70 हज़ार लोग थे जिसमें उस एक वर्ष में छह प्रतिशत यानी 64 हज़ार लोगों की वृद्धि दर्ज की गई.
ब्रिटेन में बाहर से आने वाले लोगों की संख्या 2003-2004 में एक लाख 67 हज़ार थी जो 2004-2005 में बढ़कर दो लाख 35 हज़ार हो गई.
बाहर से आकर ब्रिटेन में रहने वाले लोगों की वजह से देश की जन्मदर में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है यानी उन परिवारों में तुलनात्मक रूप से बच्चे ज़्यादा संख्या में पैदा हुए.
सांख्यिकी विभाग के पीटर गोल्डब्लैट का कहना था, "अगर बाहर से लोग नहीं आते तो देश में कम बच्चों का जन्म हुआ होता और इस तरह जन्म दर नहीं बढ़ी होती."
सरकार का कहना है कि बाहर से आकर ब्रिटेन में बसने वाले लोगों की वजह से श्रम बाज़ार में अंतर को भरने में मदद मिल रही है, ख़ासतौर से प्रशासन, व्यवसाय, आव-भगत और खान-पान क्षेत्र में.
लेकिन कुछ लोगों का यह भी कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों की वजह से स्थानीय लोगों को कामकाज मिलने में मुश्किल हो रही है और इससे सार्वजनिक सेवाओं पर बोझ बढ़ रहा है.