बुधवार, 23 अगस्त, 2006 को 05:17 GMT तक के समाचार
अमरीकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने रिज़र्व मरीन सैनिकों को अफ़ग़ानिस्तान और इराक़ में तैनात करने की अनुमति दे दी है.
इसके पहले मरीन कोर ने घोषणा की थी कि उसे इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में भेजने के लिए और सैनिकों की ज़रूरत है.
मरीन कोर ने माना है कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में तैनाती के लिए अपनी मर्ज़ी से जाने के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं इसीलिए रिज़र्व सैनिकों को बुलाना पड़ रहा है.
उल्लेखनीय है कि अमरीकी मरीन सैनिको को तकनीकी रूप से काफ़ी दक्ष माना जाता है.
इसमें 1 लाख 80 हज़ार नियमित सैनिक हैं जबकि लगभग 40 हज़ार सैनिकों को रिज़र्व रखा जाता है यानि उनका उपयोग ज़रूरत पड़ने पर किया जाता है.
महत्वपूर्ण यह है कि आमतौर पर ये रिज़र्व सैनिक स्वैच्छिक रूप से अपना सहयोग देते हैं. लेकिन इस बार अमरीका को सैनिकों की ज़रूरत महसूस हो रही है इसलिए उन्हें बुलाए जाने के आदेश दिए गए हैं.
हज़ारों रिज़र्व मरीन सैनिक पहले भी इराक़ में तैनात किए जा चुके है. लेकिन वे ऐसे सैनिक थे जिनका प्रशिक्षण निरंतर चलता रहता है.
ऐसा पहली बार हुआ है जब अमरीकी सेना को 60 हज़ार ऐसे सैनिकों की ज़रूरत पड़ रही है जिन्हें नियमित प्रशिक्षण तो नहीं दिया जाता लेकिन उन्हें काम में लाया जा सकता है.
राष्ट्रपति बुश के आदेश में करीब ढाई हज़ार सैनिकों को किसी भी समय बुलाने की बात कही गई है.
अमरीकी सेना ने इसे एक समझदारी भरा क़दम बताया है लेकिन आलोचकों का मानना है कि यह दिखाता है कि इराक़ में अमरीकी सेना का इस्तेमाल ज़रूरत से ज़्यादा हो रहा है.