मंगलवार, 22 अगस्त, 2006 को 10:42 GMT तक के समाचार
विश्व शक्तियों के आर्थिक पैकेज के बदले ईरान अपना परमाणु संवर्धन कार्यक्रम निलंबित करेगा या नहीं, इस मसले पर ईरान के जवाब का इंतज़ार किया जा रहा है.
ईरान को परमाणु संवर्धन से रोकने के लिए जो प्रस्ताव रखे गए हैं उसमें असैनिक परमाणु तकनीकी में सहयोग देने की पेशकश शामिल है.
सोमवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामनेई ने एक भाषण में कहा कि उनका देश अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखेगा.
लेकिन जानकारों का कहना है कि मंगलवार के आधिकारिक वक्तव्य का सुर कुछ बदला हुआ हो सकता है.
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बीबीसी संवाददाता माइक सार्जेंट का कहना है कि ईरान पहले ही कह चुका है कि वो परमाणु मुद्दों को सुलझाने के लिए और बातचीत करना चाहता है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि वे एक व्यापक और बहु-आयामी जवाब देंगे.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मांग की है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम रोक दे वरना उस पर आर्थिक और कूटनीतिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
अस्पष्ट जवाब
ईरान ने स्पष्ट नहीं किया है कि वो इस पेशकश पर किस तरह जवाब देगा. तेहरान में मौजूद यूरोपियन राजदूतों को लिखित जवाब दे सकता है या हो सकता है कि वो यूरोपियन यूनियन के विदेश नीति प्रमुख हाविए सोलाना को ब्रसेल्स में एक पत्र भेजे.
असैनिक परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ पैकेज में आंशिक रूप से आर्थिक प्रतिबंध हटाने की भी बात है.
संवर्धित यूरेनियम, नाभिकीय रिएक्टरों में ईंधन के काम आती है लेकिन अधिक संवर्धित यूरेनियम से परमाणु बम भी बनाया जा सकता है.
ईरान का कहना है कि उनके नाभिकीय कार्यक्रम का सिर्फ असैनिक कामों में उपयोग किया जाता है. ईरान का कहना है कि नाभिकीय अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने के बाद उसे नाभिकीय कार्यक्रम चलाने का पूरा हक़ है और उसने कोई नियम नहीं तोड़ा है.
लेकिन पश्चिमी ताकतों ने ईरान पर संवर्धन कार्यक्रम को छिपाने का आरोप लगाया है और वाशिंगटन ने सैनिक कार्रवाई की संभावना से अब तक इनकार नहीं किया है.
जानकारों का कहना है कि ईरान इस बात से पूरी तरह से वाकिफ है कि संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक प्रतिबंध पर आम सहमति बनाना मुश्किल होगा क्योंकि रूस और चीन इसका विरोध कर सकते हैं.
पश्चिमी देशों को इस बात का भी डर है कि इससे तेल की कीमतें भी बढ़ सकती हैं क्योंकि ईरान दुनिया का चौथे नंबर का तेल उत्पादक देश है.