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शुक्रवार, 18 अगस्त, 2006 को 05:55 GMT तक के समाचार

जेम्स रेनॉल्ड्स
बीबीसी संवाददाता, येरूशलम

युद्ध के बाद निराशा झेल रहे हैं ओल्मर्ट

इसराइली जनता ने युद्धविराम की घोषणा के बाद इसके आकलन का काम शुरू कर दिया है और आकलन कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री ओल्मर्ट के लिए यह निराशा का मुँह देखने का समय है.

पहली बार युद्ध जैसी स्थिति का नेतृत्व कर रहे ओल्मर्ट वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाए जैसी कि अपेक्षाएँ थीं.

युद्ध के बाद की उपलब्धियों को देखें तो इसराइली सेना अपने दो प्रमुख लक्ष्य हासिल कर पाने में विफल ही रही.

पहला तो यह कि अपने अगवा किए गए सैनिकों को वापस पाने में इसराइल विफल रहा. इसके अलावा हिज़्बुल्ला का निरस्त्रीकरण भी अभी तक नहीं हो सका है.

बीते सोमवार को इसराइल की संसद में ओल्मर्ट के लिए लोगों को यह समझा पाना काफ़ी मुश्किल हो गया था कि वो देश को एक सही दिशा में ले जा रहे हैं.

यहाँ तक कि ओल्मर्ट अपने सहयोगी दलों को भी सहज नहीं रख पा रहे हैं.

निराशा

इसराइल से लेबनान की सीमा की ओर जब यीरॉन के इलाके पर नज़र डालते हैं तो किबुज़ों (यहूदियों की कृषि और सामुदायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने वाली जगह) में बच्चे खेलते हुए नज़र आ जाते हैं.

अभी युद्ध के दौरान कई इसराइलियों ने सीमा पार करके इन किबुज़ों को अपना नया डेरा बना लिया था पर अब उन्हें वापस लौटना पड़ा है और वे अपने प्रधानमंत्री से निराश हैं.

इनमें से एक कहते हैं, "देखिए, मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री सही मायने में तैयार नहीं थे और उन्होंने मोर्चा खोल दिया. मुझे लगता है कि इस लड़ाई से हमें बहुत कुछ हासिल हुआ है क्योंकि हिज़्बुल्ला हमारे साथ बुरा कर रहे थे पर लड़ाई में जाने से पहले तैयारी ज़रूरी होती है."

ओल्मर्ट इसी वर्ष सत्ता में आए थे और लोगों को अपेक्षाएँ थीं कि ओल्मर्ट शेरोन के काम को अंजाम तक पहुँचाते हुए इसराइल की सीमाओं को सुरक्षित बनाएँगे.