बुधवार, 16 अगस्त, 2006 को 08:46 GMT तक के समाचार
दक्षिणी लेबनान में अंतरराष्ट्रीय बल तैनात करने के काम में तेज़ी लाने के लिए बेरुत में कई बैठकें हो रही हैं.
फ़्रांस, तुर्की, मलेशिया और पाकिस्तान के विदेश मंत्री बेरुत में मिल रहे हैं.
माना जा रहा है कि इन देशों के सुरक्षाकर्मी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा बल का हिस्सा हो सकते हैं.
इस बातचीत में फ़्रांसीसी विदेश मंत्री फ़िलिप दूस्त ब्लाज़ी अहम भूमिक निभा रहे हैं. उन्होंने इस बात की पुष्टि की है फ़्रांस सुरक्षा बल का हिस्सा बनने के लिए तैयार है.
वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने स्थिति को खतरनाक बताया है और कहा है कि सबसे ज़रूरी ये है कि अंतरराष्ट्रीय बल तैनात हो.
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि अगले दो हफ़्तों में दक्षिणी लेबनान में तीन हज़ार से ज़्यादा शांति सैनिकों की तैनाती की जाएगी.
सुंयक्त राष्ट्र के मुताबिक वो दक्षिणी लेबनान में पहले से तैनात दो हज़ार अंतरराष्ट्रीय सुरक्ष बलों की संख्या बढ़ाकर पंद्रह हज़ार करना चाहता है.
लेकिन किसी देश ने अपने जवान भेजने का पक्का वादा अभी तक नहीं किया है. अब तक माना जा रहा है कि शांति सैनिकों में अधिकांश फ्रांस के होंगे.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि एक वरिष्ठ संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने बताया है कि सब देश सैनिक तैनात किए जाने के नियमों के बारे में स्पष्टीकरण चाहते हैं.
वैसे लेबनान में पहले से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा बल तैनात हैं लेकिन जुलाई में लड़ाई भड़कने के बावजूद उन्हें हिज़्बुल्ला और इसराइल के बीच हुए युद्ध में दख़ल देने का अधिकार नहीं था.
सोमवार को इसराइल और हिज़्बुल्ला के बीच हुए युद्धविराम के बाद, दक्षिणी लेबनान से इसराइल को हटना है और लेबनान की सेना को वहाँ तैनात किया जाना है.
इसराइल ने कहा है कि उसके सैनिक दक्षिणी लेबनान से अगले 10 दिनों में हट सकते हैं.
विस्थापितों की सुरक्षा
इस बीच दक्षिणी लेबनान से विस्थापित हुए लोगों का अपने घरों की ओर लौटना जारी है.
हालांकि उन्हें चेतावनी दी जा रही है कि अभी लौटना खतरे से खाली नहीं है.
इसराइल ने कहा है कि जब तक लेबनानी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा बल तैनात नहीं किए जाते, इलाक़े सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है.
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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जंग के दौरान इस्तेमाल हुए विस्फोटकों में से कई नहीं फटे हैं और जहाँ तहाँ बिखरे पड़े हैं. घर वापसी के दौरान लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक करीब दो लाख पचास हज़ार लोग अपने घरों को वापस लौट चुके हैं और राहत एजेंसियों का कहना है कि करीब पाँच लाख वापस लौट रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि टायर शहर में कई गाँवों में लोगों के घर जल चुके हैं और वहाँ बिजली-पानी भी नहीं है.