बुधवार, 16 अगस्त, 2006 को 18:04 GMT तक के समाचार
फ्रांस लेबनान में तैनात होनेवाली संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का फ़रवरी तक नेतृत्व करने पर सहमत हो गया है.
लेकिन साथ ही उसने स्पष्ट किया है कि शांति सेना की संख्या पर्याप्त होनी चाहिए है और उसकी भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए.
इधर कुछ ही घंटे बाद लीतानी नदी के दक्षिण में लेबनानी सेना तैनात होने जा रही है. इसी स्थान पर इसराइली और हिज़्बुल्ला लड़ाकों के बीच संघर्ष हुआ था.
यह तैनाती गुरूवार से शुरू हो जाएगी और यह संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव के अनुरूप होगी जो सोमवार को युद्ध विराम के लिए लागू हुआ था.
लेबनान के मंत्रिमंडल ने बुधवार को यह मंज़ूरी दी कि दक्षिणी हिस्से में क़रीब 15 हज़ार सैनिक तैनात किए जाएंगे और यह काम गुरूवार से ही शुरू हो जाएगा.
इसराइल का कहना है कि उसके सैनिक इस क्षेत्र से हटने लगे हैं.
इसराइल
उधर इसराइल के रक्षा मंत्री आमिर पेरेट्ज़ ने इसकी जाँच के लिए एक आयोग गठित किया है कि लेबनान पर हमले के दौरान पूरा सैन्य अभियान किस तरह से चलाया गया.
बीबीसी के येरुशलम संवाददाता का कहना है कि जब से इस तरह की ख़बरें आनी शुरू हुई थीं कि इसराइली सेनाएँ लेबनान में हिज़्बुल्ला के ख़िलाफ़ उतनी कामयाबी हासिल नहीं कर रही हैं जितनी की पहले उम्मीद लगाई गई थी.
उसके बाद से ही आमिर पेरेट्ज़ को विपक्ष, मीडिया और आम लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा था.
इस आयोग की अध्यक्षता इसराइली सेना के एक रिटायर प्रमुख करेंगे और इस आयोग से अंतरिम रिपोर्ट तीन सप्ताह में सौंपने को कहा है.
शरणार्थी
इधर संयुक्त राष्ट्र के राहत और सहायता अधिकारियों ने कहा है कि लेबनान में गत सोमवार को युद्धविराम लागू होने के बाद से लगभग ढाई लाख लोग अपने घरों को वापस लौट चुके हैं लेकिन अब भी लाखों लोग अपने घर वापस लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं.
लेबनान के टायर शहर में मौजूद एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि बहुत से लोग अपनी कारों में घरेलू सामान भरकर अपने घरों की तरफ़ लौट रहे हैं.
लेबनान के सैनिक इसराइली हमलों में तबाह हुए सड़कें और पुलों की मरम्मत करने और यातायात को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
दक्षिणी लेबनान में अधिकारियों ने कहा है कि राहत और बचाव में लगे कार्यकर्ताओं ने इसराइली बमबारी में ध्वस्त हुई इमारतों के मलबे से कम से कम तीस और शव बरामद किए हैं.
उधर उत्तरी इसराइल में भी जो लोग हिज़्बु्ल्ला के रॉकेट हमलों से बचने के लिए अपने घरों से दूर चले गए थे, अब उन्होंने भी लौटना शुरू कर दिया है.