शनिवार, 12 अगस्त, 2006 को 14:25 GMT तक के समाचार
फियोना वर्ज
बीबीसी संवाददाता
लेबनान में युद्ध विराम के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित किया है- प्रस्ताव संख्या 1701.
सुरक्षा परिषद के इस प्रस्ताव के केंद्र में है- संघर्षविराम, और दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सेना और संयुक्तराष्ट्र के अधीन एक अंतरराष्ट्रीय शांतिरक्षक बल की संयुक्त तैनाती.
इन सैनिकों की तैनाती के समय को, प्रस्ताव में अहम स्थान दिया गया है.
इसमें इसराइली सरकार से कहा गया है कि एक अंतरराष्ट्रीय बल और लेबनानी सेना के 15 हज़ार सैनिकों की तैनाती शुरू होने के साथ ही वो सीमा पार से अपने सैनिकों को हटाने का काम शुरू कर दे.
मतलब नए बल की तैनाती और इसराइली सेना की वापसी का काम साथ-साथ हो.
सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि लेबनान में कोई भी हथियार वहाँ की सरकार की अनुमति से ही रहे. इस प्रावधान का ये अर्थ हुआ कि चरमपंथी संगठन हिज़बुल्ला को निरस्त्र किया जाए.
उल्लेखनीय है कि हिज़्बुल्ला को निरस्त्र करने के इससे पहले के प्रस्तावों की अनदेखी होती रही है.
बफ़र-ज़ोन
प्रस्ताव में इसराइल-लेबनान सीमा और दक्षिणी लेबनान से गुजरने वाली लितानी नदी के बीच एक बफ़र-ज़ोन के प्रावधान को दीर्घावधि के समाधान के रूप में देखा जा सकता है.
सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के अनुसार इस इलाक़े में अंतरराष्ट्रीय बल और लेबनान सरकार की सेना ही रह सकती है.
पारित प्रस्ताव में जहाँ हिज़्बुल्ला से सारे हमले रोकने के लिए कहा गया है, वहीं इसराइल से सिर्फ़ आक्रामक कार्रवाई रोकने की अपेक्षा की गई है.
मतलब इसराइल के रक्षात्मक रूप में सैनिक कार्रवाई करने की गुंजाइश रहती है. लेबनान इसे इसराइल के पास हमले का एक बहाना छोडे़ जाने के तौर पर देखता है.
इन सब प्रावधानों के बीच सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील भी की गई है, वे महीने भर की बमबारी से तबाह देश लेबनान में पुनर्निर्माण के काम में खुल कर सहायता दें.