शनिवार, 12 अगस्त, 2006 को 11:03 GMT तक के समाचार
ब्रिटेन में मुस्लिम संगठनों ने प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को एक खुला पत्र लिखकर आह्वान किया है कि देश की विदेश नीति में तुरंत बदलाव किया जाए.
इन मुस्लिम संगठनों ने पत्र में कहा है कि सरकार की इराक़ और लेबनान नीति की वजह से ब्रिटिश नागरिकों को चरमपंथी हमलों के ख़तरे में रखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को लिखे एक खुले पत्र में मुस्लिम नेताओं ने कहा है कि सरकार की नीतियों की वजह से अतिवादी विचारधारा को मदद मिल रही है.
इस पत्र पर ब्रिटेन के लगभग तीस मुस्लिम संगठनों और अधिकतर मुस्लिम सांसदों ने दस्तख़त किए हैं.
उधर ब्रितानी सरकार के एक मंत्री डगलस एलेक्ज़ेंडर ने कहा है कि किसी भी देश की सरकार अपनी विदेश नीति को चरमपंथी धमकियों से निर्देशित नहीं होने दे सकती.
ब्रिटेन के अख़बारों के लिए एक विज्ञापन के तौर पर लिखे गए इस पत्र में इराक़ में अशांति और लेबनान में जल्दी युद्ध विराम कराने में नाकामी की तरफ़ ध्यान दिलाया गया है.
इस पत्र पर तीन मुस्लिम सांसदों, तीन लॉर्ड्स और 38 मुस्लिम संगठनों ने दस्तख़त किए हैं जिनमें मुस्लिम काउंसिल ऑफ़ ब्रिटेन भी शामिल है.
अनुचित और अन्यायपूर्ण
पत्र में प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से अनुरोध किया गया है कि आतंकवाद और अतिवाद से निबटने के लिए अपने प्रयास तेज़ करें और विदेश नीति में इस तरह के बदलाव करें जिससे नज़र आए कि ब्रिटेन सरकार आम लोगों की ज़िंदगी की क़द्र करती है.
लेबर सांसद सादिक़ ख़ान ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. उन्होंने कहा है कि ब्रिटिश विदेश नीति को बहुत से लोग 'अनुचित और अन्यायपूर्ण' समझते हैं.
सादिक़ ख़ान ने कहा, "हम इसे पसंद करें या नहीं, बेइंसाफ़ी की इस तरह की भावना से चरमपंथियों के इरादों को बढ़ावा मिलता है."
सादिक़ ख़ान ने कहा, "एक उदारवादी के तौर पर हम अतिवाद का मुक़ाबला करने के लिए जो कुछ हो सकता है वो हम करेंगे. हम आशा करते हैं कि इस मुहिम में सरकार हमारा साथ देगी."
"इसमें विमानों में साथ में ले जाने वाले सामान के नियम बदलने भर से काम नहीं चलेगा बल्कि यह दिखाना होगा कि सरकार दुनिया में न्याय की हिमायत करती है."
मुस्लिम काउंसिल ऑफ़ ब्रिटेन के महासचिव मोहम्मद अब्दुल बारी ने कहा कि आम आदमी चाहें ब्रिटेन में हों, मध्य पूर्व में या दुनिया में कहीं और, सबको संरक्षण मिलना चाहिए.
इस पत्र पर सांसद शाहिद मलिक और मोहम्मद सरवर, लॉर्ड पटेल ऑफ़ ब्लैकबर्न, लॉर्ड अहमद ऑफ़ रोथरहम और बरूनस उद्दीन ने भी हस्ताक्षर किए हैं.
दोहरे मानदंड
पत्र पर मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ़ ब्रिटेन, ब्रिटिश मुस्लिम फ़ोरम और मुस्लिम पार्लियामेंट ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन ने भी दस्तख़त किए हैं.
लॉर्ड अहमद ने इन आरोपों का खंडन किया है कि इस तरह के पत्र से चरमपंथियों के विचारों को समर्थन मिल सकता है.
उन्होंने बीबीसी रेडियो-4 के टुडे कार्यक्रम में कहा, "हम चाहते हैं कि दुनिया में जहाँ भी आम नागरिकों पर हमले होते हैं उनकी एकजुट होकर निंदा की जाए."
"हम यह कह रहे हैं कि लेबनान के संबंध में ब्रिटेन सरकार का जो रुख़ रहा है वह दोहरे मानकों के तौर पर देखा जा रहा है, उस रुख़ से ऐसा लगता है कि हम दुनिया के इस हिस्से में तो आम लोगों की परवाह करते हैं लेकिन किसी दूसरे हिस्से में आम लोगों के बारे में कोई परवाह नहीं करते हैं."
लॉर्ड अहमद ने कहा कि इराक़ युद्ध की वजह से ब्रिटेन में अतिवाद और बढ़ा है.
उन्होंने कहा, "इराक़ एक बड़ी समस्या रही है और ज़ाहिर है कि इराक़ की वजह से तनाव बहुत बढ़ा है, हमारे समुदायों में दरार भी बढ़ी है और इससे देश में अतिवाद भी बढ़ा है."