सोमवार, 07 अगस्त, 2006 को 19:10 GMT तक के समाचार
इसराइल और हिज़बुल्ला के बीच चार हफ्तों से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों में लेबनान का पक्ष रखने के लिए अरब लीग ने अपना एक प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र भेजा है.
बेरुत में अरब देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक में यह फ़ैसला किया गया. बैठक के दौरान लेबनान के प्रधानमंत्री ने मदद के लिए भावनात्मक अपील की थी.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लेबनान में जारी संकट को सुलझाने के लिए एक प्रस्ताव के मसौदे पर बहस हो रही है. इस प्रस्ताव के मसौदे पर अमरीका और फ्रांस सहमत हैं.
प्रस्ताव के तहत लेबनान में संघर्ष तुरंत रोकने की मांग की गई है. उधर अरब लीग के सदस्य देश और लेबनान चाहते हैं कि इस प्रस्ताव में संघर्षविराम और इसराइली सैनिकों की तत्काल वापसी को भी जोड़ा जाए.
दूसरी तरफ अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत दक्षिणी लेबनान में ऐसी स्थिति न बने जिसका फ़ायदा हिज़बुल्ला को मिलता हो.
संघर्ष जारी
इन कूटनीतिक प्रयासों के बीच उधर लेबनान में इसराइली सैनिकों और हिज़बुल्ला के बीच संघर्ष जारी है.
लेबनान से मिल रही रिपोर्टों में कहा गया है कि इसराइल के ताज़ा हमले में कम से कम 15 लोग मारे गए हैं. घटनास्थल पर पहुंचे बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह हमला ऐसे स्थान पर हुआ है जहां हिज़बुल्ला को भारी समर्थन मिलता रहा है.
संवाददाता के अनुसार हमले में एक बहुमंजिली इमारत ढह गई है. राहत कार्य जारी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ घायलों को पास के इलाक़ों में ले जाया गया है.
इससे पहले इसराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में लोगों से अपने घरों में ही रहने की हिदायत देते हुए कहा था कि रात के दस बजे के बाद घर से बाहर निकलने से उनकी जान खतरे में पड़ सकती है.
यह निर्देश उस इसराइली हमले के एक दिन बाद आए हैं जिसमें 25 लोग मारे गए थे.
दक्षिणी लेबनान के टायर शहर में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह शहर पूरे लेबनान से कट गया है और यहां मेडिकल सुविधाएं और भोजन पहुंचना मुश्किल हो रहा है.
इससे पहले दिन में हिज़बुल्ला ने उत्तरी इसराइल में सैकड़ों रॉकेट दागे हैं और साथ ही एक जासूसी विमान को भी निशाना बनाया है.
इसराइल की अपील
इस संघर्ष के बीच इसराइल के प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट ने सभी यहूदियों से इसराइल का साथ देने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि इसराइल अपने अस्तित्व की खूनी लड़ाई लड़ रहा है जिसकी उसे भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है लेकिन हिज़बुल्ला को हथियारों से लैस होने का मौका देने से बेहतर है ये क़ीमत चुकाना.
ओल्मर्ट ने कहा कि इसराइल और हिज़बुल्ला में एक आधारभूत अंतर है और वो ये कि युद्ध में नागरिकों की मौत को इसराइल असफलता मानता है जबकि हिज़बुल्ला इसे सफलता मानता है.